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Jaunpur News: लाखों रुपये खर्च फिर भी 60 सामुदायिक शौचालयों में लटक रहे ताले

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केराकत। अधिकारियों-कर्मचारियों की सुस्ती से सरकार का बहुचर्चित स्वच्छ भारत मिशन हकीकत में दिखावा साबित हो रहा है। सामुदायिक शौचालयों के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। तहसील के 4 ब्लाॅकों में 260 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण 9.10 करोड़ की लागत से कराया गया। इनमें से 60 शौचालयों में आज भी ताले लटक रहे हैं।
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एक शौचालय साढ़े तीन लाख से बनाया जा रहा है। केराकत व मुफ्तीगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव सुल्तानपुर, अमहित, मुर्की, एकौनी व सूरतपुर में लाखों की लागत से बने यह शौचालय या तो बंद हैं या जर्जर होने की कगार पर हैं। न इनमें बिजली है, न पानी और न ही सफाई की व्यवस्था। ग्रामीणों का आरोप है कि जब घर-घर पहले ही शौचालय बन चुके थे, तो सामुदायिक शौचालयों पर दोबारा इतना बड़ा खर्च क्यों किया गया। अगर बनाए भी गए थे, तो उन्हें चालू क्यों नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन की बंदरबांट की गई है। सब कुछ देख अधिकारी मौन हैं।
एक नजर में शौचालय
केराकत ब्लॉक शौचालय की संख्या-71
मुफ्तीगंज ब्लॉक शौचालय की संख्या-51
डोभी ब्लॉक शौचालय की संख्या-69
जलालपुर ब्लॉक शौचालय की संख्या-69
कुल शौचालय-260
ये सामुदायिक शौचालय अधूरे
सहायक विकास अधिकारी रजनीश पांडेय बताते हैं कि मुफ्तीगंज ब्लाॅक में 51 सामुदायिक शौचालय हैं। इनमें एक घुरहुपूर का अपूर्ण है और केराकत विकास खंड में 71 सामुदायिक शौचालय है जिसमे 4 शौचालय अपूर्ण हैं। डोभी के सहायक पंचायत अधिकारी किसन कुमार ने बताया यहां 69 शौचालय बनाए गए थे सभी संचालित हैं। विकास खंड जलालपुर के सहायक पंचायत अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि 69 शौचालय निर्माण के लिए धन जारी हुआ है। सचिव के लापरवाही से छह आज भी अधूरे हैं। भड़ेहरी गांव का एक शौचालय जमीन के विवाद के कारण नहीं बन पा रहा है।
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वर्जन ...
मामले की जांच करवाकर संबंधित शौचालयों की देखरेख कर रहे अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। -सुनील कुमार, एसडीएम केराकत।
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