इंजीनियर कृष्ण कुमार जायसवाल ने कविता का हाथ पीला कर पिता का धर्म निभाया है। खेतासराय के पास स्थित असरफपुर उसरहटा निवासी साहेबदीन राजभर की पुत्री कविता को उन्होंने वर्ष 2013 में गोद लिया था। उन्होंने कविता की पढ़ाई पूरी कराने के बाद एएनएम की डिग्री दिलाई तो उसे जिला अस्पताल में नौकरी मिल गई। 23 मई को कविता की डोली को विदा कर मिसाल कायम किया।
मूल रूप से खेतासराय निवासी कृष्ण कुमार जायसवाल भाजपा नेता हैं। वर्ष 2013 में वह उसरहटा गांव की राजभर बस्ती में गए थे। वहां झोपड़ी में बैठ कर पढ़ाई कर रही कविता पर उनकी निगाह पड़ी तो उन्होंने उससे बातचीत शुरू कर दी। बातचीत के दौरान उन्हें लगा कि यह बेटी पढ़ना चाहती है लेकिन जिस माहौल में वह रह रही है, यहां रहकर शायद वह अपना सपना पूरा नहीं कर सकेगी। यही सोचकर कृष्ण कुमार ने कविता के पिता से बात की और उनकी सहमति पर उन्होंने कविता को गोद ले लिया। कलेक्ट्रेट के पास स्थित अपने आवास पर रखकर उसे पढ़ाया। साथ ही एएनएम की डिग्री दिलाई। उसे डिग्री मिली तो जिला अस्पताल में नौकरी भी मिल गई। 23 मई को आजमगढ़ के कोहड़ा निवासी दिलीप राजभर के साथ कविता का विवाह कर अपने धर्मपिता की जिम्मेदारी निभाई। कृष्ण कुमार ने बताया कि उनकी अपनी एक बेटी है जो मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। एक बेटा भी है। कविता की जिज्ञासा को देखते हुए उन्होंने उसे गोद ले लिया।