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बच्चों के इलाज के लिए अलग से बनेगा कोविड वार्ड

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जौनपुर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कमजोर पड़ने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग अब तीसरी लहर को लेकर चौकन्ना हो गया है। इस चरण में सबसे ज्यादा खतरा बच्चों पर बताया जा रहा है। लिहाजा अभी से उनके दवा-उपचार के लिए संसाधन जुटाए जाने लगे हैं। बच्चों के लिए अलग से कोविड वार्ड बनाने की तैयारी है। शासन का निर्देश आने के बाद विभाग इसके लिए उपयुक्त जगह की तलाश कर रहा है।
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कोरोना की दूसरी लहर पहली से ज्यादा खतरनाक रही। इसके प्रभाव से पिछले डेढ़ माह में ही करीब सौ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पहली लहर में इतनी मौतें एक साल के दौरान हुई थीं। कई लोगों ने इस बार अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया है। लिहाजा उनका जिक्र सरकारी रिकार्ड में नहीं आ पाया है। कोरोना कर्फ्यू और जांच-उपचार में तेजी के चलते अब दूसरी लहर का असर कमजोर पड़ा है। नए केस कम होने शुरू हुए हैं तो अब तीसरी लहर का अंदेशा भी जताया जाने लगा है। विशेषज्ञों का दावा है कि तीसरे चरण में सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर होना है। 18 वर्ष से कम आयु होने के कारण अभी वह टीकाकरण से भी दूर हैं। छोटे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है। ऐसे में वह संक्रमण की चपेट में आन् शुरू हुए तो हालात भयावह हो सकते हैं। खतरे के मद्देनजर शासन ने अभी से तैयारी शुरू करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य महकमा इसके लिए कमर कस कर जुट गया है। बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाने के लिए खाका तैयार हो रहा है। इस वार्ड को ऐसे जगह तैयार किया जाएगा, जहां भीड़ कम हो और उनके साथ एक अभिभावक भी रह सके। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग जगह की तलाश में जुटा हुआ है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बच्चे प्रभावित नहीं हुए हैं। धीरे-धीरे संक्रमण कम हो रहा है। सरकार तीसरे लहर के संक्रमण को लेकर तैयारी कर रही है। बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाने का निर्देश मिला है। वार्ड बनाने के लिए खाका तैयार हो रहा है। बच्चों का टीका आने का इंतजार हैं।
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बच्चों के इलाज के इंतजाम नाकाफी
जौनपुर। बच्चों के इलाज के लिए जिले में अभी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। जिला व महिला अस्पताल में एसएनसीयू व एनआईसीयू वार्ड बने हैं। कुछ ग्रामीणों के सीएचसी में 5 बेड के एसएनसीयू स्थापित हैं। इसमें नवजात से दो वर्ष तक के बच्चों का उपचार हो सकता है। इस आयु वर्ग से बड़े बच्चों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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साइलेंट स्प्रेडर हो सकते हैं बच्चे
जौनपुर। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल का कहना है कि जिस तेजी से संक्रमण फैल रहा है, उससे बच्चों में कोरोना का प्रसार होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। अभी तक इस तरह का केस सामने नहीं आया है, लेकिन अलर्ट रहना होगा। बच्चों में कोरोना संक्रमण के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं। इसलिए उन्हें वायरस का साइलेंट स्प्रेडर यानी मौन प्रसारक माना जा सकता है। बच्चे वायरस के सुपर स्प्रेडर भी हो सकते हैं जो वयस्कों को संक्रमित करते हुए बड़े स्तर पर बीमारी फैला सकते हैं।
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दो शिशुओं में मिला कोविड का संक्रमण
जौनपुर। तीसरी लहर के खतरे के बीच शहर के एक निजी अस्पताल में दो शिशुओं में कोविड का संक्रमण पाया गया है। इनकी उम्र ढाई से तीन माह की है। खास बात यह कि इनके परिवार में अन्य किसी को भी कोरोना नहीं हुआ है, लेकिन जन्म के कुछ माह बाद ही बच्चों में कोविड के लक्षण पाए गए हैं। एंटीजन किट में रिपोर्ट पॉजिटिव भी आई है। इनमें एक बच्चा मड़ियाहूं क्षेत्र का है, जबकि दूसरा शहर के पॉलीटेक्निक चौराहा क्षेत्र का। विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है। बच्चों में संक्रमण के इस स्तर से चिकित्सक भी हैरान हैं।
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ये एहतियात बरतें ::
* बच्चों को साफ-सुथरे माहौल में रखें। उनको छूने से पहले हाथों को सैनिटाइज करना न भूलें। मास्क लगाकर ही उनके पास जाएं। कमरे को लगातार सैनिटाइज करते रहें। स्तनपान कराने के दौरान भी सावधानी बरतने की जरूरत है।
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