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द्वार पर जो नीम वर्षों से खड़ा है, लग रहा परिवार का बेटा बड़ा है....

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जौनपुर। संगम साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान निगोह की ओर से बबुरी गांव में बाबू अंबालाल यादव स्मृति कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से भूतपूर्व शिक्षक बाबू अंबालाल यादव को श्रद्धांजलि दी। कवि आलोक शास्त्री ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। अजय शान ने जल है तो कल है... गजल सुनाकर वाहवाही लूटी तो योगेंद्र प्रताप मौर्य ने द्वार पर जो नीम वर्षों से खड़ा है, लग रहा परिवार का बेटा बड़ा है... सुनाकर समाज को सकारात्मक संदेश दिया। संदीप कुमार बालाजी ने दोमुंहे सांप के बारे में सुना तो बार-बार था, देखा तो आदमी की शक्ल थी उसकी... प्रस्तुत की। आलोक द्विवेदी शास्त्री ने आयु जीवन का ब्याज चुकाए, सांसें सूदखोर बन जाएं... प्रस्तुत कर श्रोताओं का ध्यान आकृष्ट किया। नरेंद्र सिंह पंकज ने यह पत्थरों का शहर है आइना ले जाओगे किधर से.... सुनाकर लोगों को सोचने पर विवश किया। अरुण यादव प्रयास ने सादर नमन तुझको बाबू... सुनाकर बाबूजी को श्रद्धांजलि दी। इंद्रजीत वियोगी, कर्मराज किसलय, एकल बनारसी, रामसागर सरस, गंगाधर मिश्र बेखबर आदि ने भी कविताएं प्रस्तुत की। संचालन संदीप कुमार बालाजी और अध्यक्षता नरेंद्र सिंह पंकज ने किया। स्वामी रामजी किंकर महाराज ने आभार जताया। इस मौके पर भैयालाल वर्मा, नंदलाल मौर्य, उमाशंकर पटेल, विनोदचंद्र पांडेय, विकास, अरविंद कुमार, विनय, हरिनाथ यादव, शिव प्रकाश, लालबहादुर यादव आदि मौजूद रहे।
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