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Jaunpur News: जौनपुर की इमरती भी अब जीआई उत्पादों में शामिल

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जौनपुर। जिले की इमरती को भी अब जीआई उत्पादों में स्थान मिल गया है। बीते दो वर्षों से जिला प्रशासन व उद्योग विभाग इसे जीआई टैग दिलाने की जुगत में लगा था। बीते शुक्रवार को चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री कार्यालय में जौनपुर की इमरती के साथ ही यूपी के कुल 14 उत्पादों को जीआई टैग दिया गया।
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जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में जीआई रजिस्ट्री चेन्नई कार्यालय में 160 नए उत्पाद जीआई पंजीकृत हुए। इनमें उत्तर प्रदेश के 14 उत्पादों के साथ अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेधालया, असम, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात और उत्तराखंड के भी जीआई शामिल हैं। वाराणसी क्षेत्र से नौ जीआई उत्पाद पंजीकृत हुए हैं। इनमें जौनपुर की इमरती को भी स्थान मिला है। जीआई टैग से समृद्ध विरासत को बचाने और बढ़ाने के अभियान ने जोर पकड़ा है। इस अभियान का हिस्सा बने नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक), जिला प्रशासन जौनपुर और उद्योग विभाग के सहयोग व कई बार प्रयास के बाद इमरती को जीआई उत्पाद का तमगा दिया गया है।
प्रतिदिन 2.5 से तीन क्विंटल इमरती का उत्पादन व खपत
प्रसिद्ध इमरती जिले में करीब 10 स्थानों पर बनाई जाती है। दुकानदारों के मुताबिक प्रतिदिन 2.5 से तीन क्विंटल इमरती का उत्पादन व खपत दोनों है। इसकी आपूर्ति भी देश के बड़े महानगरों समेत विदेशों तक है। उर्द की दाल, देसी घी, बलिया की देसी चीनी को मिलकार इसको बनाया जाता है। मिट्टी की भट्ठी पर मध्यम आंच में इसे पकाया जाता है। इस इमरती की खासियत यह है कि इसमें मिली हुई चाशनी हाथों में नहीं लगती है।
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जिले का पहला जीआई उत्पाद बनी इमरती
जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती जिले का पहला ऐसा उत्पाद है जिसे जीआई टैग मिला है। अब तक जिले में किसी अन्य उत्पाद को यह तमगा नहीं हासिल था। जीआई उत्पाद का तमगा मिलने का फायदा यह है कि इससे उस उत्पाद को देश और दुनिया में खास पहचान मिलती है। किसी उत्पाद को खास भौगोलिक पहचान मिल जाने से उसके उत्पादकों को उसकी अच्छी कीमत मिलती है। इसका फायदा ये भी है कि अन्य उत्पादक उस नाम का इस्तेमाल कर अपने सामान की मार्केटिंग भी नहीं कर सकते हैं।
मूली, मक्का और इत्र को भी जीआई टैग दिलाने की कवायद
इमरती को जीआई टैग दिलाने के बाद अब जिला प्रशासन व उद्योग विभाग जिले की प्रसिद्ध मूली, मक्का और इत्र को जीआई टैग दिलाने में जुट गए हैं। इसके लिए नाबार्ड से भी सहयोग लिया जा रहा है। जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि इसके लिए भी पत्राचार किया गया है।
जौनपुर की इमरती पहले से ही प्रसिद्ध है। जीआई तमगा मिलने से अब इसकी ख्याति और बढ़ेगी। विदेशों तक इसे लोग जानेंगे। जल्द ही इस श्रेणी में अन्य उत्पाद भी जुड़ेंगे। - रविंद्र कुमार मांदड़

इमरती के बाद मक्का, मूली और इत्र के लिए भी कवायद शुरू की गई है। इसके लिए कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जल्द ही इन्हें भी जीआई उत्पाद की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। - हर्ष प्रताप सिंह, उपायुक्त उद्योग
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