जौनपुर। जिला कारागार की व्यवस्था चरमरा गई है। 320 की क्षमता वाली जेल में 1157 से अधिक बंदी जेल में बंद हैं। ऐसे में जेल के बंदियों की नींद पूरी नहीं हो पा रहीं है। मंत्री, विधायक से लेकर अधिकारी बंदियों के सोने का इंतजाम करने की सिफारिश जेल अधिकारियों से कर रहे हैं। दूसरी जगह जेल ट्रांसफर होने के चक्कर में जेल के बैरकों की मरम्मत कार्य भी नहीं हो रहा है। ऐसे में कभी भी बंदी बगावत कर सकते हैं। बैरकों में सोना तो दूर बैठने तक की जगह नहीं है। स्थिति यह है कि बैरकों में बंदियों का दम घुट रहा है। बंदी बाहर सोने के लिए जेल के अधिकारियों से गुहार लगाते हैं।
जेल में नौ बैरक हैं। इसके अलावा तीन छोटे - छोटे बैरक भी हैं। इसमें 1157 से अधिक बंदी बंद हैं। बैरकों की क्षमता 40 बंदियों की है, लेकिन इसकी तुलना में 150 से अधिक बंदी बंद हैं। ऐसे में उन्हें करवट बदलने में भी परेशानी होती है। कुछ बंदी सोते हैं तो कुछ बैठ कर रात बिताते हैं। जेल प्रशासन के सामने मजबूरी यह है कि वह बंदियों को सोने की व्यवस्था कहां कराएं। जो स्थान है वह जीर्ण- शीर्ण हालात में है। दूसरे जगह जेल के स्थानांतरण होने की प्रक्रिया तो चार सालों से चल रही है, लेकिन अभी तक भूमि का अधिग्रहण भी नहीं हो सका है। जेल ट्रांसफर होने की प्रक्रिया शुरू होने की वजह से जेल मुख्यालय से कोई बजट बैरकों की मरम्मत कार्य एवं नए बैरक बनाने के लिए नहीं मिल रहा है।
गर्मी के समय में बैरकों में गर्मी और बारिश के मौसम में पानी टपकता है। जिसकी वजह से बंदियों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। सूत्रों की मानें तो जेल प्रशासन ने बंदियों को सोने के लिए शिफ्ट बनाया है। हर बंदी की जुबान से यहीं बात निकलती जेलर साहब मुझे सो लेने दो। मानवाधिकार का माखौल जेल में उड़ रहा है।