मछलीशहर (जौनपुर)। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र में करीब साढ़े छह साल पहले सड़क किनारे मिली अधजली लाश की शिनाख्त स्थानीय एक गांव निवासी किशोरी के रूप में हुई है। डीएनए टेस्ट से पहचान होने के बाद पुलिस ने परिजनों के बयान के आधार पर किशोरी का अपहरण कर उसकी हत्या के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में मानवाधिकार आयोग की सिफारिश पर पुलिस के खिलाफ लापरवाही का केस मछलीशहर कोतवाली पहले ही दर्ज है।
गांव में सड़क किनारे एक मई 2014 को अज्ञात किशोरी (14) की जली हुई लाश मिली थी। उसी समय स्थानीय गांव निवासी एक किशोरी के भाई ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। परिजनों ने आशंका जताई थी कि गांव में मिली लाश किशोरी की ही हो सकती है, लेकिन पुलिस पीड़ित परिवार की बातों को नजरंदाज करती रही। घटना के दो साल तक जब पुलिस किशोरी का पता नहीं लगा सकी तो किशोरी के भाई ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से न्याय की गुहार लगाई। आयोग के आदेश पर पुलिस पर लापरवाही बरतने का मुकदमा मछलीशहर कोतवाली में दर्ज हुआ और जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। गुम हुई किशोरी के माता-पिता और शव का डीएनए मिलान कराया गया। रिपोर्ट आने के बाद यह साबित हो गया कि सड़क किनारे मिला शव उसी गांव से गायब हुई किशोरी की ही थी। मामले में पुलिस ने परिजनों तहरीर ली और तीन लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया। पुलिस ने अपहरण कर हत्या करने के साथ ही पाक्सो एक्ट की धारा में अभियोग पंजीकृत कर मंगलवार को एक आरोपी को गिरफ्तार किया। प्रभारी निरीक्षक मछलीशहर दिनेश प्रकाश पांडेय ने बताया कि सिकरारा थाना क्षेत्र के अरुआवा गाव निवासी संतोष पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अन्य दो आरोपियों की तलाश की जा रही है।