लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम पर सभी की निगाहें थीं। इसका प्रमुख कारण इस सीट से मैदान में उतरे भाजपा और सपा के प्रत्याशी थे। दोनों ही पार्टियों ने बाहर के प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था। भाजपा ने कृपाशंकर सिंह और सपा के बाबू सिंह कुशवाहा का नाम घोषित होते ही पार्टी में अंदरूनी विरोध देखने को मिला था। हालांकि बाहरी होने का फैक्टर सपा के बाबू सिंह कुशवाहा के लिए तो वरदान साबित हुआ, वहीं दूसरी ओर कृपाशंकर सिंह के लिए अभिशाप बन गया।
कृपाशंकर सिंह और बाबू सिंह कुशवाहा का टिकट घोषित होते हुए ही पार्टी के क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किया गया। दरअसल कृपाशंकर सिंह का राजनीतिक जीवन शुरू से ही महाराष्ट्र से जुड़ा रहा। कोविड काल के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। लोकसभा चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह से नजदीकियों के कारण उन्हें जौनपुर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतारा गया। तभी से जौनपुर के लोगों ने बाहरी-बाहरी की रट लगानी शुरू की थी।
ऐसा ही कुछ सपा के बाबू सिंह कुशवाहा के साथ भी हुआ। बाबू सिंह कुशवाहा बसपा कैबिनेट मंत्री थे। जौनपुर से उनका कोई जुड़ाव नहीं रहा। इन्हें भी टिकट मिला तो पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। हालांकि जमीनी स्तर पर प्रचार और लोगों तक पहुंच ने इन्होंने जीत मुकम्मल की।
बड़े नेताओं की रैलियां और आश्वासन भी नहीं आया काम