कुशल शिक्षिका के साथ ही वह सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती थीं। उत्कृष्ट कार्य के चलते पांच सितम्बर वर्ष 1998 को शिक्षक दिवस के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने राष्ट्रपति भवन में पुरस्कृत कर उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक के सम्मान से अलंकृत किया था। 30 जून 2001 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह 81 वर्ष की उम्र में बीस वर्ष से प्रति दिन विद्यालय आकर बच्चों को विज्ञान तथा अंग्रेजी व संस्कृत विषय की शिक्षा दे रही हैं।