फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जर्जर भवन दफ्तर, बेखबर अफसर

विज्ञापन
08- कलेक्ट्रेट तहसील में जर्जर भवन कभी भी हो सकता है हादसा। - फोटो : JAUNPUR
विज्ञापन
जौनपुर। बारिश के बाद जर्जर भवनों के ढहने का खतरा बढ़ गया है। आम लोगों के पुराने व जर्जर मकान को प्रशासन ढहाने का निर्देश दे रहा है, वहीं सरकारी जर्जर भवनों के प्रति बेपरवाह है। शहर में कई सरकारी विभागें के दफ्तर जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। उनकी हालत डराने वाली है, मगर जिम्मेदारों की बेरुखी से कर्मचारी जान जोखिम में रखकर यहां काम करने को विवश हैं।
विज्ञापन

सदर पशु अस्पताल, रोडवेज वर्कशाप, जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम व जिला कृषि रक्षा कार्यालय सहित दर्जनों विभागों के भवन जर्जर हो गए हैं। इन कार्यालयों में लगभग 200 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन भवन जर्जर होने से हर समय उनकी जान को खतरा बना रहता है। हालत यह है कि भवन जर्जर होने के कारण बारिश का पानी छत से बाहर जाने की बजाय अंदर कमरों में गिरता है। हल्की बारिश होने पर झरने की तरह छत से पानी टपकता है, जिससे काम करने में कर्मचारियों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वहीं कार्यालय के अभिलेख भी भींगते रहते हैं। अभिलेखों को सुरक्षित रखने में ठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
तहसील सदर : भवन देखकर ही लगता है डर
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित सदर तहसील का नजारत कक्ष व लेखपाल कक्ष जर्जर हो गया है। उसकी मरम्मत भी नहीं कराई जा रही है। बरामदा टूटा हुआ है। छत भी जगह-जगह चिटक गई है। इससे बारिश में झरने की तरह पानी कमरों में गिरता है। अभिलेखों को भी रखने में परेशानी का सामाना करना पड़ रहा है। अभिलेखों को या तो कर्मचारी अपने साथ ले जाते हैं या फिर दूसरे कार्यालयों में रखते हैं। नायब तहसीलदार सदर मांधाता सिंह ने बताया कि निष्प्रयोज्य घोषित करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। बजट आने पर नया भवन बनाने का कार्य किया जाएगा।
विज्ञापन

गिर चुकी एक कमरे की छत
जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम और जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय भी जर्जर हो गया है। जिला कृषि अधिकारी कार्यालय के एक कमरे का छत टूट कर गिर चुकी है। अन्य कमरों की छत भी जर्जर है, जिसके गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसा ही हाल भूमि संरक्षण प्रथम और जिला कृषि रक्षा अधिकारी के कार्यालय का भी हाल है। इन कार्यालयों की छतें व दीवारें जर्जर हो गए हैं। इन कमरों में लगभग 75 से अधिक कर्मचारी बैठ कर काम करते हैं। जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार चौबे ने बताया कि भवन के निर्माण की स्वीकृति शासन से मिल गई है। बजट आने पर भूमि का चयन कर नये भवन का निर्माण कराया जाएगा।
बरसात में झरना बन जाता है रोडवेज का वर्कशॉप
रोडवेज बस डिपो का वर्कशाप भी जर्जर हो गया है। इस जर्जर भवन में आज भी 70 से अधिक कर्मचारी बसों के मरम्मत आदि का कार्य करते हैं। कमरों की दीवारें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कभी जमींदोज हो सकती हैं। छत टूटने से बारिश का पानी कमरों में गिरता है। इसमें बैठकर काम करना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं स्टोर रूम के छत से पानी टपकने से उसमें रखे बसों को बनाने के लिए रखे नये पूर्जो में जंग भी लग जाता है, जो खराब हो जाते हैं। जिससे दिक्कत का सामना करना पड़ता है। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विजय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि इसके लिए निदेशालय को कई बार पत्र भेजा गया है।
सुबह लगाते हैं टेबल-कुर्सी, शाम को हटाते हैं
पशु पालन विभाग के सदर तहसील के अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है, लेकिन अभी तक इस भवन निष्प्रयोज्य घोषित नहीं किया गया है। भवन के जर्जर होने से कर्मचारियों को काम करने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं छत टूटने के कारण दवा आदि को दूसरे स्थानों पर रखना पड़ रहा है। सुबह आने के बाद दवा सहित कुर्सी, टेबल आदि सामानों को लाना पड़ता है। इस कार्यालय में पशु चिकित्साधिकारी सहित कुल छह कर्मचारी तैनात हैं, जो अपनी जान खतरे में डालकर काम करने को विवश हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि भवन को निष्प्रयोज्य घोषित करने के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया है। बजट आने के बाद नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें