बीआरपी इंटर कॉलेज के मैदान पर आयोजित सात दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन कथावाचक प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि मनुष्य को जीवन में कुछ पाने के लिए तपस्या जरूरी है। भगवान की कथा गंगा जी के समान है और यह जहां उपस्थित होती है, वह स्थानीय तीर्थ बन जाता है। मनुष्य जब तीर्थ में पहुंच जाता है तो वह अपने आप तीर्थ के प्रभाव से तर जाता है।
कथा शुरू होने से पहले मुख्य यजमान भाजपा नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह ने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन किया। प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि कुछ लोग भजन सुनकर सुख का अनुभव करते हैं, परंतु भजन तो केवल कान को ही सुख देता है। जीव का कल्याण तो कथा ही करती है। भगवान की कथा मनुष्य को भगवान के शरण में पहुंचा देती है।
कहा कि धन संग्रह करने से बढ़ता नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कन्नौज में एक व्यापारी के यहां कई सौ करोड़ मिला, लेकिन अगर उस धन को परमार्थ में लगाए होते तो ऐसी विडंबना देखने को नहीं मिलती। भगवान के प्राकट्य की कथा का गायन करते हुए उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में भी वर्णन है कि जब हनुमान जी ने माता सीता को भगवान की कथा सुनाई तो उनका सारा दुख भाग गया। हनुमान जी ने भगवान की कथा विभीषण की सुनाई तो उन्हें भगवान की शरणागति मिल गई। भगवान की कथा मनुष्य के हृदय के ताप को मिटाकर सभी संशय का नाश कर देती है। श्री राम कथा मनुष्य को सुखी जीवन के मार्ग और साधन प्रदान करती है।
मौके पर सेवा भारती के जिलाध्यक्ष डॉ. तेज सिंह, डॉ. वेदप्रकाश, डॉ. आरएन त्रिपाठी, अरविंद सिंह, शिक्षक नेता प्रदीप सिंह, कर्मचारी नेता राकेश श्रीवास्तव, टीडीपीजी कॉलेज के प्रबंधक राघवेंद्र प्रताप सिंह, बीआरपी के प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।