सिंगरामऊ, क्षेत्र के डडारी में आयोजित श्रीमद भागवत कथा। स्रोत-आयोजक
सिगरामऊ। क्षेत्र के डंडारी गांव में हो रहे सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास परम पूज्य धर्मराज महाराज ने कहा कि पिता, गुरु और सच्चे मित्र के यहां जाने के लिए निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती। इन संबंधों का आधार प्रेम, श्रद्धा और आत्मीयता है।
उन्होंने कहा कि जहां सम्मान और अपनापन हो, वहां औपचारिक निमंत्रण की अपेक्षा नहीं की जाती, लेकिन हर परिस्थिति में मर्यादा का पालन आवश्यक है। प्रवचन में धर्मराज महाराज ने बताया कि राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन भगवान शिव और माता सती को आमंत्रित नहीं किया।
यह समाचार मिलने पर भगवान शिव ने अपनी जटा से वीरभद्र और भद्रकाली को उत्पन्न कर दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कराया। धर्मराज महाराज ने कहा कि अहंकार विनाश का कारण बनता है, मोह विवेक को नष्ट करता है। इस मौके पर मुख्य यजमान वंश गोपाल दादा सहित राजकुमार उपाध्याय, आशीष मिश्र, विमल मिश्रा, धीरज उपाध्याय, ऋतिक उपाध्याय आदि मौजूद रहे।