28 फरवरी के बाद बदले हालात, 1500 जहाज फंसे
उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से पहले तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला था और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सामान्य थी। लेकिन ईरान पर हुए हमलों के बाद हालात बिगड़े और वर्तमान में करीब 1500 जहाज तथा 2000 से अधिक चालक दल के सदस्य इस मार्ग में फंसे हुए हैं। इलाही ने दोहराया कि यह संकट ईरान की वजह से नहीं, बल्कि युद्ध शुरू करने वाली ताकतों के कारण उत्पन्न हुआ है।
अमेरिका पर आरोप, मंशा पर सवाल
संयुक्त राज्य अमेरिका पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी वास्तविक समझौते के लिए गंभीर नहीं है और ऐसी शर्तें रखता है जिन्हें ईरान कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका 7,000 मील से अधिक दूरी तय कर ईरान पर हमला करता है और इसका उद्देश्य तेल की कीमतों को नियंत्रित करना तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन अपने पक्ष में करना है। इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “अच्छी बातचीत” वाले बयान पर भी सवाल उठाए गए और इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया गया।
ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं और न ही वह इन्हें बनाना चाहता है। इसे देश की सैन्य नीति से बाहर बताया गया। आयतुल्लाह इलाही ने कहा कि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई पहले ही परमाणु हथियारों को 'हराम' घोषित कर चुके हैं, जिससे ईरान की नीति स्पष्ट हो जाती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
संघर्ष के चलते तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है। इलाही ने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां अपने आर्थिक हितों के लिए इस संकट को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के कारण हथियार और ड्रोन उद्योग को बढ़ावा मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संघर्ष से कुछ वर्गों को सीधा लाभ हो रहा है।
वार्ता, अविश्वास और युद्धविराम
ईरान की ओर से कहा गया कि वह तत्काल युद्धविराम के लिए तैयार है, लेकिन दूसरी ओर से सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए इलाही ने कहा कि पूर्व में कई समझौते तोड़े गए, जिससे भरोसे का संकट गहरा गया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
अंत में ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयास करे और युद्ध के बजाय संवाद व कूटनीति को प्राथमिकता दे।