जौनपुर। जिले में जीएसटी चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य कर विभाग (जीएसटी कार्यालय) की जांच में खुलासा हुआ है कि जनपद के 54 व्यापारियों ने लगभग 7.50 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की है। यह कार्रवाई राज्य कर विभाग की विशेष जांच की रिपोर्ट में आई है। इसमें व्यापारियों के फर्जी बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिटर्न में हेरफेर जैसी गड़बड़ियों का पता चला।
जिले में 26, 788 व्यापारी जीएसटी के तहत पंजीकृत हैं। इनसे बीते वर्ष 2024-25 में 383 करोड़ के लक्ष्य की तुलना में 207 करोड़ 80 हजार रुपये की वसूली की गई। वाराणसी से अभिलेखों की जांच में सामने आया कि दस्तावेजों में हेरफेर कर 54 व्यापारियों ने 7.50 करोड़ की जीएसटी चोरी की। जो व्यापारी जीएसटी चोरी करते हैं, साक्ष्य के ऐसे व्यापारियों को नोटिस भेजा जाता है। जांच में पाया गया कि कुछ व्यापारी फर्जी कंपनियों के नाम पर बिल जारी कर रहे थे, जबकि कईयों ने बिक्री दिखाकर टैक्स जमा नहीं किया। इस धोखाधड़ी को लेकर संबंधित व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कर चोरी गंभीर अपराध की श्रेणी है। दोषी पाए जाने पर व्यापारियों पर 25 से 100 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जाता है, तीन साल तक की सजा का भी प्रावधान है।
पांच करोड़ की टैक्स चोरी में मुकदमा चलाने के लिए कमिश्नर की मंजूरी जरूरी
पांच करोड़ से अधिक की चोरी मिलने पर कमिश्नर की मंजूरी लेने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाता है। विभाग ने व्यापारियों को चेतावनी दी है कि वे समय से टैक्स जमा करें और नियमों का पालन करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से जिले के व्यापारिक समुदाय में सनसनी है। विभाग ने आगे भी इस तरह की जांचें जारी रखने की बात कही है ताकि टैक्स चोरी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
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वर्जन ...
बीते वर्ष 2024-25 में 54 व्यापारियों ने जीएसटी चोरी की थी। जिसका कुल आकलन साढ़े सात करोड़ था। ऐसे व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा दर्जकर सुनवाई की जा रही है। इसमें 25 से 100 फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही एक से तीन साल तक सजा भी हो सकती है।
-संतोष कुमार तिवारी, असिस्टेंट कमिश्नर, जीएसटी।