जौनपुर। बीएचयू में जांच की प्रक्रिया बंद होने के बाद जौनपुर में कोरोना की जांच की रफ्तार मंद पड़ गई है। पहले जहां रोजाना 40-50 सैंपल भेजे जाते थे, वह अब 15-20 नमूनों तक सिमट गई है। रिपोर्ट आने में भी देर हो रही है। लखनऊ तक सैंपल भेजने की जहमत से बचने के लिए अफसर सुस्ती बरत रहे हैं। ऐसे हाल में कोरोना संदिग्धों की पहचान की चुनौती बढ़ रही है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी तेज हुआ है।
कोरोना के संदेह में जिले से लिए जाने वाले सैंपल की जांच कुछ दिन पूर्व तक बीएचयू की लैब में हो रही थी। कम दूरी होने के कारण रोजाना आसानी से सैंपल पहुंच भेज दिए जाते थे। इस कारण प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग भी सैंपल लेने में खूब तेजी दिखा रहा था। नए मरीजों की पहचान कर संक्रमण रोकने के मकसद से एक दिन में 40 से 50 नमूने लिए जा रहे थे। इनकी रिपोर्ट भी 2-3 दिन में नियमित रूप से पहुंच जा रही थी। सैंपल जांच में तेजी का असर रहा कि कोरोना का संक्रमण रोकने में प्रशासन को काफी हद तक सफलता भी मिली है। बीएचयू की लैब बंद होने के बाद से जिले के सभी सैंपल जांच को लखनऊ भेजे जा रहे हैं। ढाई सौ किमी दूर सैंपल पहुंचाने की दिक्कत और वहां की भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी सैंपल लेने की रफ्तार कम कर दी है। आंकड़ों पर गौर करें तो 30 अप्रैल तक कुल 872 लोगों के सैंपल जांच को भेजे गए थे, जबकि इसके बाद सिर्फ 95 सैंपल लिए गए हैं। आलम यह है कि दो दिन पहले मुुंबई से आए कोरोना संक्रमित पिकअप चालक के साथ यात्रा करने वाले छह युवकों के अब तक सैंपल ही नहीं लिए गए हैं। संपर्क में आए अन्य लोगों को भी क्वारंटीन में रखकर विभाग शांत बैठ गया है। जिम्मेदारों का कहना है कि अभी उनमें लक्षण स्पष्ट नहीं है, इसलिए उनके सैंपल नहीं लिए जा रहे। जिले के 150 संदिग्ध रोगियों के सैंपल बीएचयू में ही रुके हैं। एक सप्ताह बीतने के बाद भी इनकी रिपोर्ट नहीं आ पाई है।
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ऐसे लोगों के सैंपल ही लिए जा रहे हैं, जिनमें कोरोना के लक्षण नजर आ रहे हैं। मुंबई से आए पिकअप चालक के साथ यात्रा करने वालों को क्वारंटीन में रखा गया है। उनमें लक्षण अभी स्पष्ट नहीं है। वाराणसी में लंबित सैंपल के बारे में कोई निर्देश नहीं मिला है। -डॉ. रामजी पांडेय, सीएमओ।