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एकात्म मानववाद में संसाधनों का उचित उपयोग पर जोर

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टीडी कॉलेज मे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित करते जगद्गुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग व? - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट के कुलपति प्रो. योगेश चंद्र दुबे ने कहा कि विकास के केंद्र में मानव का होना आवश्यक है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद का उद्देश्य व्यक्ति एवं समाज की जरूरतों को संतुलित करते हुए गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है। वे रविवार को तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बोल रहे थे.
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उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के सहयोग से आयोजित एकात्म मानववाद आध्यात्मिकता का द्वार विषयक संगोष्ठी के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद प्राकृतिक संसाधनों के साधारण उपयोग का समर्थन करता है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार राज्य एवं समाज के लिए बहुत उपयोगी हैं। जो व्यक्ति किसी व्यक्ति का शोषण करता है, वह समाज का शोषण करता है।
अध्यक्षता कर रहे कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय मानव और मानवता के हिमायती थे। उनके विचार आज ज्यादा प्रासंगिक हैं। प्राचार्य प्रो. आलोक कुमार सिंह ने कहा कि अध्यात्म मन को आत्मा से जोड़ता है और एकात्म मानववाद मनुष्य को मनुष्य से जोड़ता है। संयोजक प्रो. रामकुमार गुप्त ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि जब तक देश में अंतिम व्यक्ति का उदय नहीं होगा, उसका जीवन सुख में नहीं होगा तब तक देश का विकास नहीं होगा। संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों के लगभग 80 विद्वानों में प्रतिभाग कर अपने शोध पत्र का वाचन किया।
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