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अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका अहम : पुरोहित

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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अर्थशास्त्र विभाग में भारत की उभरती आर्थिक शक्ति और विकसित भारत 2047 विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है। दून विश्वविद्यालय देहरादून के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन प्रो. एचसी पुरोहित ने कहा कि आज वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की उभरती आर्थिक शक्ति दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक पसंदीदा विकल्प बन रही है। वैश्विक महामारी कोरोना के बाद जहां विश्व की कई बड़ी आर्थिक शक्तियां गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं, वहीं भारत अपनी दूरदर्शी आर्थिक नीतियों के कारण तेजी से उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित हुआ है। बीते वर्ष किए गए आर्थिक सुधारों जैसे आयकर स्लैब में परिवर्तन के बाद कर छूट के दायरे का विस्तार, जीएसटी 2.0 के अंतर्गत टैरिफ में बदलाव, बहुप्रतीक्षित चार श्रम संहिताओं का क्रियान्वयन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए मनरेगा के दायरे का विस्तार कर गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (जीराम जी) जैसे कदम रोजगार सृजन और ग्राम स्वराज की स्थापना की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे। यह सभी प्रयास विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगे। कार्यशाला को आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ एवं चौधरी बंशी लाल विश्वविद्यालय भिवानी हरियाणा के आचार्य प्रो. एसके सिन्हा ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अनावश्यक टैरिफ के बावजूद भारत का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है। इससे स्पष्ट है कि भारत व्यापार और औद्योगीकरण के क्षेत्र में एक विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में उभरा है। कार्यशाला में अतिथियों का स्वागत डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुशील कुमार ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. निशा पांडेय, डॉ. सुशील कुमार सिंह एवं प्रिंस सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। संचालन डॉ. राकेश कुमार उपाध्याय ने किया।
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