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Jaunpur News: 7 दिन बाद फिर लौटा घना कोहरा, यलो जोन में आया जिला

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सुबह कोहरे के बीच स्कूल जाते बच्चे। संवाद
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जौनपुर। तकरीबन सप्ताहभर बाद शनिवार को घना कोहरा फिर लौटा। इसके कारण कई स्थानों पर दृश्यता शून्य हो गई। सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। कोहरे के चलते सड़क हादसे भी हुए। कोहरे के साथ सुबह से ही गलन भी बढ़ गई। अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस से लुढ़ककर 6 पर आ गया। दोपहर 12 तक समूचा जिला कोहरे की चादर में लिपटा रहा। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ से जारी बुलेटिन के मुताबिक प्रदूषण के मानक पर जौनपुर जिला यलो जोन में रहा। शाम होते ही गलन बढ़ गई और लोग ठिठुरने लगे। शुक्रवार की रात आठ बजे से ही कोहरा शुरू हो गया था। सुबह करीब पांच बजे 20 मीटर भी साफ नहीं दिख रहा था। शहर से बाहर कई स्थानों पर दृश्यता शून्य हो गई। वाहन चालक शहर में भी लाइट जलाकर चल रहे थे। सुबह घना कोहरा छाने के कारण दिनभर ठिठुरन रही, बाजार और सड़कें सूनी रहीं और यातायात प्रभावित हुआ, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को घरों में रहने पर मजबूर होना पड़ा। तीन दिन तक मौसम साफ रहने के बाद शनिवार को फिर करवट ली। दोपहर बाद धूप खिली लेकिन गलन कम नहीं हुई। धुंध के चलते 12 बजे के बाद सूर्य के दर्शन नहीं हुए। हवा चलने के कारण से गलनभरी ठंड में लोग ठिठुरने लगे। कोहरा पड़ा तो फिर से लोगों को ठंड का एहसास हुआ। दोपहर बाद खिली चटख धूप से लोगों ने राहत महसूस की थी लेकिन शाम होते ही गलन बढ़ गई। पूरी रात गलन का असर रहा। ठंड के चलते बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। हाईवे, मुख्य मार्गों और संपर्क मार्गों पर कोहरे के चलते लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। मौसम की बेरुखी से दिहाड़ी मजदूर व पटरी दुकानदार कांपते दिखे। ठंड से बचने के लिए चौक-चौराहों पर दिनभर लोग अलाव से चिपके रहे। ठंड से मानव ही नहीं पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। बेसहारा मवेशी ठंड से बचने के लिए झुंड बनाकर खाली स्थानों पर बैठे दिखे।शनिवार को घने कोहरे के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या कम रही। दोपहर दो बजे तक 884 मरीज इलाज कराने पहुंचे। ठंड के चलते ओपीडी भी देर से शुरू हुई। कोहरे से 11 बजे तक ओपीडी में गिने-चुने मरीज ही पहुंचे। जबकि सामान्य मौसम में सोमवार और शनिवार को ओपीडी में 1200 से 1300 के करीब मरीज आते हैं। गलन के चलते शनिवार की शाम छह बजे से आवाजाही कम हो गई। दुकानों पर भी ग्राहक कम दिखे। जरूरी काम निबटाकर लोग जल्दी घर लौट आए। शाम को बहुत जरूरी होने पर ही लोग घरों से बाहर निकले। रात में दुकानें भी जल्दी बंद हो गईं। इससे बाजार में सन्नाटा पसर गया। गलन ऐसी थी घर में बैठने पर पैर फट रहे थे। लोग घरों में दुबके रहे।
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