सीसीएमबी हैदराबाद के पूर्व निदेशक और बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. लालजी सिंह ने कहा कि कश्मीरी पंडित, पाकिस्तानी पठान और यूरोपिय जातियों में काफी आनुवांशिक समानताएं पाई गईं हैं।
भारत, पश्चिम बंगाल, केरल, चीन और पूर्वोत्तर भारत के लोगों में भी काफी आनुवंशिक समानताएं हैं। वह शनिवार को पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में बायोटेक्नोलाजी विभाग की ओर से आयोजित जैव प्रौद्योगिकी एवं मानव कल्याण विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अफ्रीकी महाद्वीप से अंडमान-निकोबार भारत होते हुए दक्षिण पूर्व एशिया की ओर गया था। अफ्रीकी महाद्वीप के मलाई झील के पानी का 95 प्रतिशत जल सूखने के कारण संभावना है कि उनका पलायन हुआ हो। यह पलायन 135 से 75 हजार वर्ष पूर्व हुआ। भारत में 4635 पारिभाषित जातियों के प्रकार हैं।
532 जनजातियां हैं, जो कि हमारी कुल जनसंख्या की 7.76 प्रतिशत हैं। यूरोप की जिप्सी जनजाति की आनुवांशिक समानता भारत के आंध्र प्रदेश की जनजाति से मेल खाती है। इससे यह सिद्ध होता है कि यहां के मूल निवासी यूरोप तक गए थे। इस जनजाति के केवल 12 लोग ही बचे हैं। इस जनजाति के लोग आपस में ही वैवाहिक संबंध बनाते हैं।
इनकी रोग प्रतिरोधी क्षमता कम होते रहने के कारण आज इनका अस्तित्व ही संकट में है। उन्होंने कहा कि अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि आर्य एवं द्रविड़ जैसी कोई प्रजाति नही थी। आर्य स्थानीय थे।पूविवि के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने देश की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान दिया है। आज आवश्यकता है कि जैव
विविधता के जरिए हम फल और सब्जियों के उत्पादन और संरक्षण को व्यापक विस्तार दें। आज हमारी प्रगति हरित क्रांति, श्वेत क्त्रसंति एवं आईटी के चलते ही वैश्विक स्तर पर हो पाई है। छात्रों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। स्वागत प्रो. डीडी दूबे ने किया। डा. प्रदीप कुमार ने अतिथियों का परिचय कराया। आयोजन सचिव डा.
वन्दना राय ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. वीके सिंह ने आभार जताया। इस अवसर पर प्रो. रामजी लाल, डा. अविनाश पाथर्डिकर, डा. रामनारायन, डा. अजय प्रताप सिंह,
डा. संगीता साहू, डा. मनोज मिश्र, डा. राजेश शर्मा, डा. एसपी तिवारी, डा. प्रवीण प्रकाश, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. अमरेन्द्र सिंह, डा. विनय वर्मा मौजूद रहे। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया।