गोमती नदी के हनुमान घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देते लोग।
सूर्योपासना का पर्व डाला छठ का समापन सोमवार उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ समाप्त हो गया। व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भोर में घाट पर पहुंच गई। इस दौरान वह रास्ते भ्ार पनिया में खाड़ हो हम करिले गोहरिया..., केरवा फरेला घवद पे ओपे सुगा मेडराय आदि गीत गाते हुए चल रहीं थीं।
पूजा में शामिल सुहागिनों ने सिन्दूर भेंट किया। साथ ही परिवार की सुख, शान्ति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना किया। छठ माता के गीत गाते हुए व्रती महिलाएं घर वापस लौटी। रास्ते में लोगों को प्रसाद का वितरण करते हुए आगे बढ़ रही थी।
परम्परानुसार पूजा की टोकरी को अपने सिर पर लेकर चल रही थी। छठ महाव्रत कार्तिक शुक्ल सप्तमी सोमवार को उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ पूरा हुआ। गन्ने का मंडप बनाकर महिलाओं ने कमर भर पानी में खड़ी होकर पूजा अर्चना की। गुड़ व घी, ठेकुआ, फ ल, मूली, सुथनी, हल्दी, हरी सब्जी, नारियल के साथ पूजा किया। चार दिनी छठ पूजा का समापन सूर्य को अर्घ्य देेने के साथ समापन हुआ। इसके बाद प्रसाद बांटा गया।