जिले में स्टांप में कमी के कुल 1731 वादों की सुनवाई चल रही है। इनमें डीएम कोर्ट में 631, एडीएम के यहां 639 और एआईजी के यहां 461 मुकदमे चल रहे हैं। जिन्होंने रजिस्ट्री के बैनामों के समय स्टांप की चोरी की थी।
नए शासनादेश के तहत स्टांप कमी के मामलों में समाधान योजना में महज 100 रुपये अर्थदंड पर वाद का निस्तारण किया जा सकेगा। हालांकि मूल स्टांप की कमी और ब्याज उतना ही लगेगा। उप निबंधन विभाग की तरफ से आय बढ़ाने के लिए भूमि की रजिस्ट्री में स्टांप शुल्क लिया जाता है।
मौके पर लोगों की खरीदी जा रही भूमि पर सर्किल रेट से स्टांप शुल्क लगाया जाता है। इसके बाद भू स्वामियों की तरफ से लगाए गए स्टांप की जांच उच्च अधिकारी प्रत्येक माह करते हैं। इसमें जिलाधिकारी स्तर से पांच, एडीएम 25, एआईजी 50 और शेष सब रजिस्ट्रार अपने स्तर से बैनामों का स्थलीय निरीक्षण कर जांच करते हैं।
जिनके स्टांप में कमी पकड़ी जाती है, प्रशासन उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए नोटिस जारी करता है। जुर्माना वसूल किया जाता है। जुर्माना जमा न करने पर मुकदमा दर्ज किया जाता है।
इसके बाद इन मामलों की पत्रावलियां जिलाधिकारी के समक्ष जाती हैं, जिसको रैंडमली तीन कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा जाता है। इनमें एक जिलाधिकारी कोर्ट, दूसरा एडीएम कोर्ट और तीसरा एआईजी कोर्ट होता है।
जहां सुनवाई में मूल स्टांप की कमी, प्रतिमाह के हिसाब से 1.60 फीसदी ब्याज और चार गुना तक अर्थदंड लगाया जा सकता है। ऐसे में सरकार की मंशा है कि पुराने मुकदमों के बोझ को कम कर सुनवाई हो। इसलिए चार गुना तक लगाए जाने वाले अर्थदंड पर राहत दी है। अब सिर्फ 100 रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा।