टीडी कालेज के संस्थापक दिवस समारोह के अवसर पर बलरामपुर हाल में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। शायरों ने अपनी रचनाओं से लोगों को खूब हंसाया। मिथिलेश गहमरी ने कहा कि मस्जिद नहीं होती ये शिवाला नहीं होता, परदे के पीछे अगर रोशनी वाला नहीं होता।
रचना त्रिपाठी ने पढ़ा प्रेम में अजब सी बात होती है...। डा. कमलेश राम ने कहा कि सुख में सबके लागे सोना-चांदी रचना को सभी ने खूब सराहा। वाहिद अली की वीर रस की रचना,अली और बजरंग बली की रचना को खूब सराहा गया। भालचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि मौसम जबसे कर गया, सबके गीले होंठ, तबसे सबको को याद आने लगा हल्दी, पीपल, सोंठ। सुधांशु ,सौरभ प्रतापगढ़ी, बीएचयू के अनूप और शिव, वाराणसी के झगड़ू मौर्य, डा. पीसी विश्वकर्मा, केके एकलव्य, कंबख्त जौनपुरी, अशोक मिश्रा, सभाजीत द्विवेदी ने भी कविता पाठ किया।
कवि बुद्धि सेन शर्मा और प्राचार्य डा. यूपी सिंह ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रबंधक अशोक सिंह, दुष्यंत सिंह, डा. लाल साहब सिंह, शिवेंद्र सिंह, डा. अकुण सिंह, डा. सरोज सिंह, डा. अनिल प्रताप सिंह, डा. विनय सिंह, डा. आरएन त्रिपाठी, डा. जीसी चौबे आदि थे। संयोजक डा. माधुरी सिंह ने आभार जताया। संचालन हरीश जी और प्रो. आरएन त्रिपाठी ने किया।