जौनपुर। जिले में भूमि विवाद के मामले हजारों में हैं। मारपीट के ज्यादातर मामलों की वजह भूमि विवाद ही है। मारपीट के बाद भले ही थानों में मुकदमा दर्ज हो जाए लेेकिन समय रहते जमीन के विवाद नहीं निपटाए जाते हैं। मामलों के समाधान की बात तो दूर राजस्व और पुलिस विभाग के अफसरों की कार्यशैली ऐसे मामलों को और उलझा देती है।
कुछ माह पूर्व श्रावस्ती मॉडल को अपनाते हुए प्रशासन ने पुलिस-राजस्व की संयुक्त टीमों को भेजकर भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण की योजना बनाई थी। मगर इस पर दोनों विभागों की उदासीनता के चलते ज्यादा काम नहीं हुआ। भूमि विवाद का निस्तारण नहीं होने के कारण कोई ऐसा दिन नहीं होता जब चार-पांच जगह मारपीट न हो। एंटी भू-माफिया सेल के गठन भी जमीन पर अवैध कब्जे हटाने के लिए हुआ था लेकिन लोगों की जमीन तो क्या सरकारी जमीन को भी खाली नहीं कराया जा सका है। एक मई 2017 को एंटी भू-माफिया सेल के गठन के बाद से अब तक 4687 शिकायतें आईं लेकिन तीन साल में महज 1117 मामलों का ही निस्तारण हो पाया। 404 मामले अदालत में हैं। 269 शिकायतें झूठी पाई गईं। दो समझौते के आधार पर हल हुए। अन्य मामलों को संबंधित विभागों को भेज दिया गया।
राजस्व विभाग के पास विचाराधीन मामलों का निस्तारण होने में वर्षों लग जाते हैं। पुलिस तो राजस्व विभाग से भी बढ़कर है। भूमि पर कब्जे की शिकायत लेकर कोई थाने पहुंचता है तो कार्रवाई ही नहीं होती है। कुछ मामलों में पुलिस एक पक्ष की ओर से कार्रवाई करके मामले को और उलझा देती है।
हत्या हुई तो जागी पुलिस
बक्शा थाना क्षेत्र के हैदरपुर गांव में 11 मई को भाजपा नेता राजमणि सिंह का पड़ोसियों से छप्पर रखने को विवाद हुआ था। मारपीट के दौरान गंभीर चोट लगने से भाजपा नेता की उपचार के दौरान बीएचयू के ट्रामा सेंटर में मौत हो गई। घटना से पहले दोनों ही पक्ष पुलिस और राजस्व विभाग का दरवाजा खटखटा चुके थे लेकिन कोई हल नहीं निकाला गया। नेता की मौत के बाद पुलिस सक्रिय हुई और दूसरे पक्ष केस दर्ज कइयों को जेल भेज दिया। बाद में छप्पर वाले स्थान पर निर्माण भी हो गया। गांव वालों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई हुई होती तो राजमणि सिंह की जान न जाती।
विवाद नहीं सुलझा, बवाल का केस अलग से
केराकत कोतवाली के पतौरा गांव निवासी उपेंद्र राय बाउंड्री बनवा रहे थे। दूसरे पक्ष के लोगों ने बाउंड्री ढहा दी। इसी बात पर दोनों में पक्षों में मारपीट हो गई। बाउंड्री निर्माण का मामला तो जहां का तहां रह गया अब दोनों मुकदमे के निस्तारण के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं। इस मामले में एक दिन पहले 31 लोगों पर मारपीट, बलवा का केस दर्ज हुआ तो दो दिन बाद पुलिस ने दूसरे पक्ष से 22 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। जमीन का विवाद जस का तस है।
दो साल से चक्कर काट रही महिला
डोभी ब्लाक के सुरसती देवी अपनी आबादी की भूमि पर कब्जा पाने के लिए लगभग दो साल से तहसील व थाने का चक्कर काट रही हैं। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की। उनका कहना है कि जब मै तहसील में जाती हूं तो एसडीएम और तहसीलदार पैमाइश कर कब्जा दिलाने को लिख देते हैं, लेकिन लेखपाल व कानूनगो सुनते ही नहीं हैं। थाने पर जाने पर राजस्व विभाग का मामला बताकर वापस कर दिया जाता है। इस मामले में कई बार मारपीट भी हो चुकी है।
राजस्व संबंधित मामलों में पुलिस सीधे दखल नहीं देती। अगर किसी भूमि पर कब्जा करने और अन्य किसी विवाद का मामला आता है तो पुलिस उसे रोकते हुए निस्तारण के लिए राजस्व विभाग को भेज देती है। - डॉ. संजय कुमार, एएसपी सिटी