अभी हाथों से सजना के लिए लगाई मेहंदी भी नहीं छूटी थी, कि उसका सुहाग छिन गया। उसकी करुण क्रंदन एवं चीत्कार से हर किसी के आंखों में आंसू की धारा बह रही थी। परिवार के लोग दहाड़े मारकर रोने लगे। पिता सूर्यनाथ यादव, माता सुगना देवी की हालत भी बेसुधों जैसी हो गई। परिवार को ढाढ़स बंधाने पहुंचे हर व्यक्ति की आखों में आंसू डबडबा जा रहे थे। हर किसी की जुबां ने यहीं शब्द निकल रहा था कि अभी तो विवाहिता के हाथों से मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा था कि पति साथ छोड़ गया। ऊपर वाला ऐसा जुल्म करेगा, सपने में भी नहीं सोचा था।
अजीत यादव पिछले तीन वर्ष से मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में काम करता था। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण घर की जिम्मेदारी भी बड़ी थी। शादी के बाद से वो बेहद खुश था। सोनल से जीवन बर साथ निभाने का वादा करने वाला अचानक इस दुनिया को अलविदा कहकर चला जाएगा।