छुट्टा गोवंश को संरक्षित करने के लिए जिले में बनाए गए अधिकांश गो-आश्रय स्थल में धूप और गर्मी से बचने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। कई जगह क्षमता से अधिक पशुओं के होने से भी दिक्कतें हैं। जिले में छुट्टा गोवंश को संरक्षित करने के लिए 96 गो-आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इसमें करीब 15 हजार 274 पशु संरक्षित हैं। अधिकांश गोशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश संरक्षित किए गए हैं। छाया, ठंडे पानी व हरे चारे के अभाव में पशुओं का स्वास्थ्य आए दिन बिगड़ता है। सुइथाकला स्थित सवायन गांव में बने अस्थायी गोशाला में गोवंश रखने की क्षमता 60 हैं, लेकिन वहां 85 गोवंश रखे गए हैं। कम्मरपुर में 70 पशु रखने की क्षमता है, लेकिन 135 पशु रखे गए हैं। सुइथाकलां में 90 की क्षमता है, लेकिन 145 पशु मौजूद हैं। उसरौली में 50 की क्षमता है जबकि 78 गोवंश रखे गए हैं। इन गोशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश होने से पशुओं को हरे चारे, ठंडे पानी व छाया के अभाव में इधर उधर भटकते रहते हैं। इस संबंध में सुइथाकला के प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल कुमार गौतम ने बताया कि 30 रुपये प्रति गोवंश भुगतान किया जाता है। उसी पैसे में पशुओं को चारा, पशु आहार दिया जाता है।
गौशाला में गर्म पानी पीने को मजबूर हैं गोवंश
केराकत। विकास खंड मुफ्तीगंज के ग्राम सभा पेसारा में गांगी नदी के किनारे खेतों के बीच में लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर पेसारा गौशाला बना है। यहां एक बछड़ा बीमार मिला। यहां पीने के पानी के नाम पर खुले में बने सीमेंट की टंकी में पानी भर दिया जाता है। केयरटेकर संतोष व प्रकाश ने बताया कि यहां विद्युत व्यवस्था नहीं है। दिन में पानी भरने के लिए कुछ देर के लिए जनरेटर चलाया जाता है।