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पोस्ट कोविड को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क

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कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोगों में तमाम तरह की दिक्कतें आ रही हैं। डॉक्टर इसे आम बोलचाल की भाषा में पोस्ट कोविड इलनेस कह रहे हैं। कुछ मामलों में तो यह इतना खतरनाक हो जा रहा है कि मरीज की मौत भी हो सकती है। पोस्ट कोविड की समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पहले से सतर्क है। मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का पोस्ट कोविड अस्पताल स्थापित किया गया है। जहां मनोचिकित्सक और फिजियो थिरैपिस्ट अपनी सेवा दे रहे हैं।
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चिकित्सकों का कहना है कि कुछ वेरिएंट मरीज के पैन्क्रियाज को सीधे नुकसान पहुंच रहे हैं। पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट के दौरान पाया गया कि मरीजों में डायबिटीज की समस्या पैदा हो गई है। पहले मरीज डायबिटिक नहीं थे। नया वैरिएंट संक्रमण बढ़ाने वाले प्रोटीन के जरिए सीधे पैंक्रियाज तक पहुंचकर बीटा सेल को नष्ट कर रहे हैं। इससे इंसुलिन बनने की प्रक्रिया बंद हो जा रही है। पोस्ट कोविड की समस्या से निबटने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड वार्ड स्थापित किया गया है। जहां पोस्ट कोविड के मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है। इस वार्ड में मनोचिकित्सक सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को अपनी सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा फिजियोथिरैपिस्ट की तैनाती की गई है। जो मरीजों की समस्या का समाधान कर रहे हैं। सीएमओ डा. राकेश कुमार का कहना है कि पोस्ट कोविड की समस्या से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का पोस्ट कोविड अस्पताल स्थापित कर दिया गया है। मरीजों के इलाज के लिए मनोचिकित्सक, फिजियोथिरैपिस्ट की तैनाती की गई है। मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है।
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