टीडी कालेज में समाज शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय एवं आरक्षण नीति विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में आरक्षण व्यवस्था पर मंथन किया गया। देश में आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था और शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने जैसे मुद्दों पर विषय विशेषज्ञों ने अपने सारगर्भित विचार रखे।
मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि 1995 के बाद समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जो सबसे बड़ा परिवर्तन है। हर व्यक्ति अपने बच्चों को पढ़ाने की हसरत रखता है। अच्छी तालीम देकर उन्हें कुछ बनाना चाहता है।
बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. पीएन पांडेय ने कहा कि भारतीय संविधान जातिगत आरक्षण की बात नहीं करता। डा. अंबेडकर ने भी यह नहीं कहा था कि समाज में आरक्षण लंबे समय तक लागू रखा जाए। आरक्षण केवल दस वर्षों के लिए लागू किया गया था, लेकिन उसे आज भी जारी रखा गया है। आरक्षण का मानक नए सिरे से तय करने की जरूरत है। मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित प्रो. संदीप पांडेय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश है कि 50 फीसदी से अधिक आरक्षण लागू न किया जाए।
चीन के बाद भारत की विकास दर सबसे अच्छी है। दुख की बात यह है कि हमारे यहां डिग्री तो सब के पास है, लेकिन योग्यता नहीं है। देश में समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की जरूरत है। लखनऊ विवि के हिंदी के प्रो. सूरज बहादुर सिंह थापा ने कहा कि हमें ऐसे समाज का निर्माण करने की जरूरत है, जहां समानता और समरसता हो। ऊंच-नीच का भेदभाव न हो। अधिवक्ता दुष्यंत सिंह ने कहा कि आरक्षण के बाद लोगों की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
कृषि वैज्ञानिक प्रो. कीर्ति सिंह ने कहा कि नियम बनाना आज आसान हो गया है, लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो पाने से वह बेकार साबित हो रहा है। टीडी कालेज के प्राचार्य डा. यूपी सिंह ने कहा कि आरक्षण जातिगत आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर होना चाहिए। इससे पहले अतिथियों ने सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी की शुरुआत की। छात्रों ने सरस्वती वंदना, कुलगीत और स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
अतिथियों को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष डा. अनिल प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर शिक्षक संघ के अध्यक्ष डा. राजीव प्रकाश सिंह, डा. एसपी ओझा, डा. लालजी त्रिपाठी, डा. राधेश्याम सिंह, डा. एसबी सिंह, डा. हिंमाशु सिंह, डा. देवब्रत मिश्र, डा. राजीव रतन सिंह, डा. मनोज सिंह, डा. पूनम मिश्र, डा. सुमन सिंह, डा. दिव्या सिंह, डा. हरिओम त्रिपाठी, डा. योगेश पाठक, डा. अरुण कुमार सिंह, डा. सीबी पाठक, डा. माधुरी सिंह आदि मौजूद थीं। संयोजक समाजशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डा. आरएन त्रिपाठी ने संचालन किया।