पोरई कला में श्रीमद्भागवत महापुराण का वाचन करते कथा व्यास। स्रोत-संवाद
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खेतासराय। सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन वाराणसी से पहुंचे मानस कोविद डाॅ. मदन मोहन मिश्र महाराज ने व्यासपीठ से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथा का बड़े ही मनोरम तरीके से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि दुष्टों के संहार और धर्म की स्थापना के लिए भगवान अवतार लेते हैं। कहा कि सच्चा संत वही है जो समाज को जागृत करने का कार्य करे। सकारात्मक सोच व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है, जबकि नकारात्मक सोच सबसे बड़ा अभिशाप। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन संघर्षों से पूर्ण रहा, फिर भी वे सदैव मुस्कराते रहे और तटस्थ भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहे। बच्चों का नाम भगवत-परक रखने का आह्वान करते हुए कहा कि अजामिल ने अंतिम समय में अपने पुत्र नारायण का नाम लिया और उसका कल्याण हो गया। उन्होंने नारी शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारी सामर्थ्य के बल पर लक्ष्मीबाई बनकर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर सकती है और ममता के माध्यम से देवकी के पुत्र कन्हैया का पालन-पोषण कर सकती है। कार्यक्रम का संचालन वशिष्ठ ने किया। जबकि व्यास का स्वागत एवं आभार आयोजक उमा शंकर मिश्र ने व्यक्त किया। इस अवसर पर शशि प्रकाश मिश्र, राजेश सिंह, रमेश सिंह, फिरतू यादव, बाल किशुन राजभर सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।