पाकिस्तान के जेल में भारतीय मछुआरे घुरहू बिंद की मौत की खबर जेल में बंद धमेंद्र ने एक पत्र के माध्यम से गांव तक पहुंचाई। उसने चिट्ठी में बताया कि न्यायालय ने उनकी रिहाई का तीन बार आदेश दिया था लेकिन पाकिस्तानियों ने उन्हें नहीं छोड़ा।
गुजरात के ओखा बंदरगाह से 8 फरवरी 2022 को समुद्र में मछली पकड़ने गए 7 मछुआरों को पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करने के कारण पाकिस्तानी तटरक्षकों ने पकड़ कर जेल में डाल दिया था। मछुआरों की रिहाई के मुद्दे को 15 अगस्त 2024 के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, किंतु सार्थक पहल नहीं होने से रिहाई नही हो सकी।
अंततः जेल में मिल रहे प्रताड़ना से तंग आकर घुरहू ने आत्मघाती कदम उठाते हुए मौत को गले लगा लिया।जेल में बंद सोनाव गांव के धर्मेंद्र ने अपने मामा के जरिए एक पत्र जेल में बंद नंदापुर निवासी लालमणि उर्फ मन्नू के घर पर मंगलवार को पहुंचाया। पत्र में बताया कि 12 दिन पहले रात में लाइट कट गई थी, अंधेरे में ही घुरहू ने फंदे से लटक कर जान दे दी।
उसने परिवार के लोगों से कहा कि न्यायालय से तीन बार रिहाई का आदेश मिलने के बाद भी उन्हें नहीं छोड़ा गया। घुरहू की मौत की खबर मिलते ही जेल में बंद सात मछुआरों के परिवार के लोग दहशत में हैं। जेल में बंद अपनों के जीवन पर संकट महसूस हो रहा है। बुधवार को घुरहू के घर मौजूद लालमणि और विनोद बिंद की पत्नियों की आंखों से पति की व्यथा बताते बताते आंसू निकल आए।