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UP: पंचतत्व में विलीन हुआ घुरहू बिंद, पाकिस्तान के जेल में हुई थी माैत, लाश पहुंचते ही मचा कोहराम; जानें मामला

Sun, 20 Apr 2025 12:20 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जाैनपुर।

सार

ग्रामीणों ने भारत सरकार और शासन प्रशासन के माध्यम से घुरहू बिंद की रिहाई कराने की मांग उठाई थी। इस मामले में जनप्रतिनिधियों द्वारा भी सार्थक पहल नहीं किए जाने को लेकर ग्रामीणों और मछुआरों के परिवारों में नाराजगी व्याप्त है।
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घुरहू बिंद की लाश घर पहुंचते ही मचा कोहराम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांच दिन की प्रशासनिक कवायद के बाद शनिवार को आधीरात के बाद घुरहू बिंद का शव उनके पैतृक आवास पर पहुंचा। मौके पर उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों के अंतिम दर्शन करने के बाद जौनपुर के रामघाट में दाह संस्कार करवा दिया। घुरहू के ज्येष्ठ पुत्र धीरज ने मुखाग्नि दी।

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जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात लगभग डेढ़ बजे डीएम द्वारा अधिकृत मत्स्य विभाग के अधिकारी, पुलिस के साथ शव लेकर घुरहू बिंद के पैतृक आवास पर पहुंचे। शव पहुंचते ही घर पर कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिवार के लोगों ने एंबुलेंस में ही अंतिम दर्शन किया।
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शव से उठ रही दुर्गंध के चलते मौके पर जमा लोगों ने दूर से ही प्रणाम किया। आधे घंटे बाद प्रशासनिक अधिकारी शव के साथ जौनपुर के रामघाट पर पहुंचे जहां भोर में मृतक के ज्येष्ठ पुत्र धीरज बिंद ने मुखाग्नि दी। शव आने से लेकर दाह संस्कार करने तक प्रशासनिक अधिकारी चौंकन्ने रहे।

मौके पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कुमार सौरभ, सीओ प्रतिमा वर्मा, तहसीलदार रवि रंजन कश्यप, ईओ विजय सिंह, उपनिरीक्षक इष्ट देव प्रसाद पांडेय देर रात तक दाह संस्कार तक डटे रहे। उक्त के अलावा ग्राम प्रधान मृत्यंजय बिंद, भाजपा नेता रामचंद्र बिंद समेत भारी संख्या में ग्रामीण भी शव यात्रा में शामिल हुए।

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ये है पूरा मामला

पाकिस्तान के जेल में भारतीय मछुआरे घुरहू बिंद की मौत की खबर जेल में बंद धमेंद्र ने एक पत्र के माध्यम से गांव तक पहुंचाई। उसने चिट्ठी में बताया कि न्यायालय ने उनकी रिहाई का तीन बार आदेश दिया था लेकिन पाकिस्तानियों ने उन्हें नहीं छोड़ा।

गुजरात के ओखा बंदरगाह से 8 फरवरी 2022 को समुद्र में मछली पकड़ने गए 7 मछुआरों को पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करने के कारण पाकिस्तानी तटरक्षकों ने पकड़ कर जेल में डाल दिया था। मछुआरों की रिहाई के मुद्दे को 15 अगस्त 2024 के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, किंतु सार्थक पहल नहीं होने से रिहाई नही हो सकी।

अंततः जेल में मिल रहे प्रताड़ना से तंग आकर घुरहू ने आत्मघाती कदम उठाते हुए मौत को गले लगा लिया।जेल में बंद सोनाव गांव के धर्मेंद्र ने अपने मामा के जरिए एक पत्र जेल में बंद नंदापुर निवासी लालमणि उर्फ मन्नू के घर पर मंगलवार को पहुंचाया। पत्र में बताया कि 12 दिन पहले रात में लाइट कट गई थी, अंधेरे में ही घुरहू ने फंदे से लटक कर जान दे दी।

उसने परिवार के लोगों से कहा कि न्यायालय से तीन बार रिहाई का आदेश मिलने के बाद भी उन्हें नहीं छोड़ा गया। घुरहू की मौत की खबर मिलते ही जेल में बंद सात मछुआरों के परिवार के लोग दहशत में हैं। जेल में बंद अपनों के जीवन पर संकट महसूस हो रहा है। बुधवार को घुरहू के घर मौजूद लालमणि और विनोद बिंद की पत्नियों की आंखों से पति की व्यथा बताते बताते आंसू निकल आए। 
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