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Jaunpur News: गोमती किनारे घाट तो बना दिए लेकिन नहीं रोक सके नालों का गिरना

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जौनपुर। प्रशासन ने गोमती किनारे घाट तो बनवा दिए लेकिन अभी भी इसमें गिरने वाले 14 नालों को बंद नहीं किया गया। ऐसे में नदी की स्वच्छता की बात करना सिर्फ छलावा है। गोमती नदी गंगा की सहायक नदी है। जौनपुर में यह बदलापुर से शुरू होकर शहर होते हुए वाराणसी के मारकंडेय महादेव धाम कैथी में जाकर पुन: गंगा नदी से मिल जाती है। गंगा नदी की सफाई के लिए केंद्र स्तर पर नमामि गंगे नाम से योजना चलाई जा रही है। इसके तहत गोमती नदी की सफाई और किनारे पर घाट बनाए जा रहे हैं। जौनपुर में शाही पुल से लेकर सद्भावना पुल के बीच नदी के दोनों ओर पक्के घाट बनाए गए हैं। एक घाट पर तो प्रतिदिन शाम को वाराणसी की तर्ज पर गोमती की आरती भी होती है। शाही पुल से सद्भावना पुल के बीच ही नदी में दो नाले आ कर मिल रहे हैं। इन्हें निर्माण के दौरान ऐसा रूप दिया गया कि दूर से देखने पर इसे कोई भी रास्ता समझेगा। यह दोनों नाले प्रत्यक्ष नदी में मिलते देखे जा सकते हैं। एसटीपी के बावजूद नदी में गिर रहा सीवेज: गोमती का पानी दूषित न हो और शहर से निकलने वाले गंदा पानी को शोधित कर अन्य प्रयोग में लाया जा सके, इसके मद्देनजर सरकार ने नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत एसटीपी का निर्माण कराया है। नमामि गंगे योजना के तहत 206.05 करोड़ की धनराशि से 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी और तीन पंपिंग स्टेशन बनाया गया है। इसके बावजूद नदी में गंदा पानी गिरता है। जो नालों के रास्ते नदी में जा रहा है।
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