मौसम ने अचानक मिजाज बदाला और मंगलवार को पूरे दिन रुक रुक कर रिमझिम बारिश होती रही। बारिश से लोगों को परेशानी हुई। हालांकि तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया।
माघ की इस बारिश को फसलों के लिए वरदान माना जा रहा है। वैसे आलू और सरसों की फसल को बारिश नुकसान पहुंचा सकती है।
सोमवार को रात करीब नौ बजे से ही आसमान में बादल छाने लगे थे। मंगलवार को सुबह नौ बजे रिमझिम बारिश शुरू हो गई। स्कूल, कालेज जाने वाले छात्रों, शिक्षकों और दफ्तर जाने वाले लोगों को परेशानी हुई।
मौसम खराब होने के चलते शाम को जल्दी ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया। कृषि वैत्रानिक इस बारिश को फसलों के लिए वरदान मान रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. संदीप का कहना है कि गेहूं, चना, जौ, अरहर आदि फसलों के लिए यह बारिश वरदान है। जबकि आलू की जो फसल खेत में पड़ी है उसके लिए नुकशान हो सकता है। सरसों में माहो लगने का खतरा बढ़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसान मिट्टी सूखने के बाद ही आलू की खुदाई करें। स्टोर करने से पहले आलू को कापर आक्सी क्लोराइड नामक दवा से शोधन कर लें। तीन ग्रम प्रति लीटर पानी की दर से इस्तेमाल करें।
जिस बोरे में आलू रखना है उस बोरे का भी इस दवा से शोधन कर लेंगे तो आलू नहीं सड़ेगी। उन्होंने कहा कि माहो से बचने के लिए सरसों में इमिडा क्लोप्रिड नामक दवा 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर उसका फसल में छिड़काव करें।