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कूड़े में फेंका मिला प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का फार्म

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कूड़े में फेंके किसान सम्मान निधि के आवेदन
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तहसील प्रशासन बता रहा निष्प्रयोज्य, किसानों ने लगाया गड़बड़ी का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
मछलीशहर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का हजारों आवेदनपत्र मंगलवार को तहसील परिसर में कूड़े में पाए जाने से खलबली मच गई। खतौनी कंप्यूटर रूम, रजिस्ट्रार कार्यालय के पास इन फार्मों के फेंके देख कर लोगों ने इसकी सूचना उप जिलाधिकारी को दी। तहसील प्रशासन इसे निष्प्रयोज्य बता रहा है लेकिन मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
किसान सम्मान निधि के लिए तहसील क्षेत्र के हजारों किसानों ने किसान सम्मान निधि का फार्म भरकर लेखपालों के पास जमा कराए थे। लेखपालों ने सत्यापन के बाद उनको रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय के कंप्यूटर रूम में फीडिंग के लिए जमा करा दिया। फार्मों की फीडिंग निर्धारित तिथि के भीतर कर लेनी थी। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी से पहले तहसील प्रशासन ने कहा था कि बेवसाइट बंद होने से पहले ही जितने फार्म मिले थे, उनकी फीडिंग कर दी गई है। मगर चुनाव से पूर्व कुछ किसानों के खाते में पैसे आए लेकिन तमाम फार्म जमा करने वाले किसान तहसीलों और लेखपालों के यहां चक्कर काटते रहे। चुनाव बीतने के बाद भी पैसे नहीं आए तो अधिवक्ता और किसानों ने फार्म जमा करने की हकीकत पता करनी शुरू की। मंगलवार को कुछ लोग खतौनी कंप्यूटर रूम व रजिस्ट्रार कार्यालय के पास हजारों फार्म कूड़े में देखे तो उन्होंने इसकी शिकायत नायब तहसीलदार कृष्ण राज सिंह से की। उनका कहना था कि लगभग 20 हजार फार्म फेंके गए हैं, जिनकी फीडिंग भी नहीं की गई। मगर तहसीलदार यह कहकर उन्हें लौटा दिया कि सभी फार्म फीड हो चुके हैं। उसके बाद लोग उपजिलाधिकारी मंगलेश दूबे के पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और किसी फार्म की फीडिंग नहीं हो पाई होगी तो कराई जाएगी।
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प्रकरण संज्ञान में आया है। फार्म को निष्प्रयोज्य बताया जा रहा है। फार्म की उपयोगिता की जांच नायब तहसीलदार को सौंपी गई है। उनसे दो दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फार्म फीड नहीं होंगे तो कराया जाएगा और कूड़े में फेंकने वालों की जवाबदेही तय की जाएगी। योजना का लाभ सभी पात्र किसानों को अवश्य मिलेगा।-मंगलेश दुबे, उपजिलाधिकारी
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