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Jaunpur News: 367 गांवों में मंडराने लगा है बाढ़ का खतरा, प्रशासन ने की तैयारी

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जौनपुर। बारिश शुरू होते ही नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है, जिला प्रशासन ने बाढ़ के खतरे वाले 367 गांवों में बाढ़ चौकियां चिह्नित की गई हैं। बाढ़ स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में यह फैसला हुआ। गोमती का जलस्तर बढ़ने लगा है इससे विसर्जन घाट की सीढ़ियां डूब गई हैं। शहर में शाही पुल के पास हनुमान घाट पर कार्य चल रहा है। जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ की अध्यक्षता में एक माह पहले ही बाढ़ स्टीयरिंग कमेटी की बैठक करके रणनीति बना ली गई है। इसके तहत सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। बाढ़ के खतरे वाले गांवों में 42 गोताखोर और 146 नाविक व नाव की व्यवस्था की गई है। वहीं 58 स्थानों पर बाढ़ चौकी बनाई जाएगी। जनपद से होकर गोमती, सई, पीली, बसुही व वरुणा नदियां गुजरी हैं, जो विभिन्न इलाकों से होते हुए अन्य जनपदों तक जाती हैं। बारिश में इन नदियों का जलस्तर बढ़ा है। इससे नदी के समीप निचले गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। अगर बाढ़ आई तो 6326 हेक्टेयर क्षेत्रफल का भू-भाग प्रभावित होगा। बाढ़ आने पर सबसे पहले शहर से गुजरी गोमती नदी के निचले हिस्से के तटीय इलाकों के अलावा केराकत, चंदवक और बदलापुर क्षेत्र में खतरा मंडराने लगता है। इन क्षेत्रों के तकरीबन 281 गांव ऐसे हैं, जो बाढ़ से प्रभावित होते हैं। यह गांव ही नदियों के किनारे बसे हैं। बाढ़ आने पर सबसे पहले शहर क्षेत्र के मियांपुर, बलुआघाट, चकप्यारअली तो केराकत तहसील में चंदवक, बंबावन, हरिहरपुर, भैंसा, बरहपुर, बलरामपुर, घुड़दौर, पोखरा, केवटली, तुरकौली, देवरहा, सराय पड़री, फत्तुपुर और मोलनापुर आदि गांव ज्यादा प्रभावित होते हैं।
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किस नदी से कितने गांव प्रभावित

गोमती नदी 99

सई नदी 43

पीली नदी एक,

सई, बसुही नदी 18

वरुणा नदी 24,

गोमती नदी से सात

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वर्जन ...

बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। एसडीएम को निर्देश है। गांवों में बैठक व ग्राम चौपाल कराई जा रही है। बाढ़ चौकिया के लिए स्थान चिह्नित कर ली गई हैं। बाढ़ आने पर नुकसान से बचा जा सके।
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-राम अक्षयबर चौहान, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व।
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