बारिश के कारण इस बार शहर के कई इलाकों में परेशानी होनी तय है, क्योंकि जिम्मेदारों ने मनमानी तरीके से काम कराते हुए सड़कों को खोद दिया है। ऐसे में बारिश होते ही कीचड़ युक्त सड़क के कारण गुजरना भारी हो जाता है। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।शहर की आबादी सवा तीन लाख से अधिक है। ऐसे में शहर से निकलने वाला गंदा पानी गंगा गोमती नदी में नहीं गिरे, इसके लिए नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत एसटीपी का निर्माण और सीवर लाइन डाली जा रही है। इन दोनों योजनाओं के लिए कुल 470.80 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत है, जिसमें नमामि गंगे योजना के तहत 206.05 करोड़ और अमृत योजना के तहत 264.77 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है। अमृत योजना के तहत मछलीशहर पड़ाव रोड पर सीवर लाइन डाली जा रही है। इस मार्ग पर जहां तक सीवर का पाइप डाला गया है। वहां तक सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे लोगों को आवागमन करने में परेशानी हो रही है। जून माह में सभी को पता है कि बारिश होगी, लेकिन अचानक जून माह से इस मार्ग पर काम लगा दिया गया। करीब एक पखवारा पहले से खोदी जा रही इस सड़क का ही हालत यह है कि कल तक इसपर दो दिन पहले तक लोगों को परेशानी हो रही थी। लेकिन, अब बारिश से कीचड़ फैलने के कारण परेशानी होनी लगी है। माना जा रहा है कि बारिश शुरू होते ही जिम्मेदार सड़क की खोदाई बंद कर देंगे, जिससे इस मार्ग पर सड़क वैसे ही छोड़ दी जाएगी, क्योंकि सड़क का निर्माण बारिश के कारण नहीं कराया जाएगा। यही हालत सिपाह से किला रोड़ का है, जो करीब एक साल से खोदी जा रही है। हैरानी की बात तो यह कि एक किमी इस सड़क की खोदाई एक साल बाद भी नहीं पूरा कराया गया है। वहीं, स्थानीय लोग मनमानी और भ्रष्टाचार तक का अब आरोप लगाने लगे हैं। लेकिन, जिम्मेदार हैं कि कान में मानों तेल डाले बैंठे हैं, जिसका खामियाजा इस मार्ग के आसपास के रहने वालों को एक दिन पहले हुई बारिश के बाद से ही उठाना पड़ रहा है। इस कारण इस मार्ग के लोग काफी आक्रोशित भी हैं।