गर्मी आते ही आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इससे निजात पाने के लिए अग्निशमन विभाग अपने आधे-अधूरे संसाधनों के साथ तैयार है। तहसीलों में स्थायी व अस्थायी अग्निशमन केंद्रों के जरिए कमान संभाली जा रही है।
जिला मुख्यालय पर अग्निशमन केंद्र जौनपुर, अग्निशमन केंद्र सतहरिया में स्थायी फायर स्टेशन तो अग्निशमन केंद्र मड़ियाहूं, अग्निशमन केंद्र केराकत, अग्निशमन केंद्र बदलापुर, अग्निशमन केंद्र शाहगंज में अस्थायी है। शाहगंज में अग्निशमन केंद्र निर्माणाधीन व मछलीशहर में अभी तक अग्निशमन केंद्र का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। सभी तहसीलों के लिए एक-एक गाड़ी के रूप में फायर टेंडर, मिनी फायर टैंकर, एक हाईप्रेशर मशीन लगाई गई है।
इन दो जगहों पर हुई अगलगी की घटना
अगलगी की दो घटनाओं में 29 मार्च को सिरकोनी के मनहल गांव में पन्नालाल निषाद की झोपड़ी में बगल में चल रहे कूड़े से निकली चिंगारी से झोपड़ी व गृहस्थी का सामान जलकर नष्ट हो गया। वहीं 28 मार्च को बदलापुर कस्बे में एक कूड़े में अज्ञात कारणों से आग लग गई, इसमें पानी फेंककर आग पर काबू पाया गया।
इन तहसीलों में हैं इतने संसाधन
जौनपुर अग्निशमन केंद्र पर 2500 लीटर का एक फायर टेंडर, 4500 लीटर का एक फायर टेंडर, पांच हजार लीटर का एक फायर टेंडर, दो बोलेरों कैंपर, एक एंबुलेंस, एक फायर बुलेट रखा गया है। यहां पर एक मुख्य अग्निशमन अधिकारी, तीन दीवान, छह चालक, 30 सिपाही हैं। अग्निशमन केंद्र सतहरिया में 2500 लीटर का दो फायर टेंडर, एक बोलेरों है, इसके संचालन के लिए एक दरोगा, एक दीवान, दो चालक, दस सिपाही हैं। अस्थायी अग्निशमन केंद्र मड़ियाहूं में एक बोलेरों कैंपर, पांच हजार लीटर का फायर टेंडर है, इसके संचालन के लिए एक दीवान, छह सिपाही, एक चालक रखे गए हैं। अस्थायी अग्निशमन केंद्र केराकत में एक बोलेरों कैंपर, 2500 लीटर फायर टेंडर है, इसके संचालन के लिए एक चालक, एक दीवान, पांच सिपाही हैं। अस्थायी अग्निशमन केंद्र बदलापुर में 400 लीटर का हाईप्रेशर मशीन है, यहां पर छह सिपाही हैं। अस्थायी अग्निशमन केंद्र शाहगंज महिला चिकित्सालय में चल रहा है। यहां पर 400 लीटर हाईप्रेशर छोटी गाड़ी, चार सिपाही हैं। अस्थायी मछलीशहर अग्निशमन केंद्र को मछलीशहर रोडवेज में चलाया जा रहा है। यहां पर एक फायर टेंडर है, इसका संचालन एक चालक व तीन सिपाही कर रहे हैं। इसके लिए सभी केंद्रों के लिए सीयूजी नंबर जारी किया गया है।
ट्रांसफार्मर के पास की फसलों को काट लें। आग लगने की स्थिति में ट्रैक्टर से जोताई करके गैप बना दें, जिससे आग की लपटें अन्य फसलों को न बर्बाद कर सकें। यदि रखी गई फसलों में आग लग जाए तो हरे पेड़ों की टहनियों से पिटाई करके बुझा दें। आसपास के पोखरे तालाबों को हमेशा भरकर रखें। जरूरत पड़ने पर आग को पानी से बुझाया जा सके। -अखिलेश प्रताप सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।