वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति ने बीएड कालेजों की फाइल तलब की है। निजी कालेजों के प्रबंधकों ने पैसा लेकर कालेज का नाम लखनऊ विश्वविद्यालय को भेजने का आरोप लगाया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वीसी ने फाइल मंगाई है। कुलपति की इस पहल से बीएड विभाग और गोपनीय विभाग में हड़कंम मचा है। जानकारी की जा रही है कि किस टेबल पर वसूली की गई है।
विश्वविद्यालय से जुड़े बीएड के 262 कालेज हैं। इन कालेजों को काउंसलिंग में शामिल करने के लिए लखनऊ विवि को नाम भेजना था। सभी कालेजों का मानक पूरा नहंीं होने के कारण पहली सूची में केवल 122 कालेजों का नाम लखनऊ विवि को भेजा गया। शेष कालेजों का नाम इस लिए नहीं भेजा गया क्योंकि उनका मानक पूरा नहीं था। हो हल्ला मचने के बाद 121 कालेज का नाम दूसरी सूची में भेजा गया।
अब 19 कालेज ऐसे बचे हैं। जिनका नाम अभी तक लखनऊ विवि को नहीं भेजा गया है। विवि की माने तो इन कालेजों ने मानक पूरा नहीं किया है जिसके कारण उन्हें काउंसलिंग में शामिल नहीं किया गया। प्रबंधकों की शिकायत पर कुलपति ने कालेजों की फाइल तलब की है। कालेजों का आरोप है कि बीएड काउंसलिंग में नाम भेजने के लिए उनसे पैसा लिया गया था लेकिन उनका नाम लखनऊ विवि को नहीं भेजा गया।
यह समस्या कोई नई नहीं है। बीएड हो या दूसरे कालेज का भी प्रवेश पत्र अथवा रिजल्ट तभी रोका जाता है। जब परीक्षा सिर पर होती है। जैसी ही प्रवेश पत्र अथवा रिजल्ट विवि रोक लेता है आनन फानन में कालेजों का मानक पूरा हो जाता है। एक वर्ष की पढ़ाई बिना मानक पूरा किए ही कालेज कराते हैं। यह विभाग की गलती है या विवि प्रशासन की लापरवाही।