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कोरोना के कहर से टूटी किसानों की कमर, कौड़ियों के भाव बिक रही सब्जियां

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जौनपुर। कोरोना कर्फ्यू के चलते सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। होटल, रेस्तरां बंद होने और सहालग के सीजन में भी शादियां न होने से सब्जियों की मांग कम हुई है। बैगन, टमाटर, भिंडी, करैला, नेनुआ, बोड़ा, कोहड़ा, लौकी आदि सब्जी पैदा करने वाले किसान मंडी में कौड़ियों के भाव बेचने को विवश हैं।
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हालांकि, मुनाफाखोरी के कारण फुटकर में इन सब्जियों के रेट कम नहीं हुए हैं। किसानों को भारी नुकसान के बावजूद शहर के लोगों को सस्ती सब्जी नहीं मिल पा रही। मंडी में किसान बैगन 8 से 10 रुपये में बेच रहे हैं, जबकि फुटकर में यही बैगन 30 रुपये किलो बिक रहा है। कोरोना से पहले सहालग के सीजन में इन सब्जियों के थोक रेट किसानों को 15 से 20 रुपये मिल जाते थे। उद्यान निरीक्षक एसएन सिंह के मुताबिक जिले में इस साल करीब 1200 किसान 300 हेक्टेयर में सब्जी की खेती किए हैं। मंडी में सब्जी बेचने आ रहे किसान कोहड़ा 8 रुपये किलो बेच रहे हैं। नेनुआ, लौकी, भिंडी, करैला 10 से 12 रुपये किलो बेच रहे हैं। बोड़ा 14 रुपये और टमाटर 10 रुपये में बेच रहे हैं। जबकि इन्हीं सब्जियों का फुटकर भाव देखें तो बैगन 30 रुपये किलो, नेनुआ 20, टमाटर 12 से 16, लौकी 16 से 20, कोहड़ा 20, भिंडी 20, करैला 20 और बोड़ा 30 रुपये किलो बिक रहा है। आढ़ती वेद प्रकाश कहते हैं कि कोरोना कर्फ्यू के चलते तमाम गतिविधियां ठप हैं। जिससे सब्जी की खपत कम हुई है। इसका असर किसान और आढ़तियों पर भी पड़ रहा है। फुटकर में सब्जी क्यों अधिक रेट पर बिक रही है, यह फुटकर दुकानदार ही जानें।
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