जिले में ऐतिहासिक तालाब और कुंडों पर अतिक्रमण हो गया है। जानकारी के बाद भी प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। इससे इन तालाबों और कुंडों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। इससे जल संरक्षण और भूगर्भ का खतरा बना हुआ है। जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
जिले में करीब 2500 से 3000 छोटे तालाब हैं। एक एकड़ के 350 अमृत सरोवर हैं। प्रशासन की ओर से पूर्व में तहसील स्तर पर समिति का गठन किया गया था। इसमें एसडीएम को जिम्मेदारी दी गई थी कि अपने क्षेत्रों में अतिक्रमण का शिकार तालाबों का चिह्नीकरण कर सूचना उपलब्ध कराएं, जो आज तक नहीं दी गई। पूर्व जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद पूर्वांचल विश्वविद्यालय में राजस्वकर्मियों को निर्देश दिया कि तालाबों और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण वाले स्थलों को चिह्नित कर खाली कराया जाए। यह प्रयास भी रंग नहीं लाया। वाजिदपुर तिराहे से लेकर शहर को विभिन्न 16 सेक्टरों में विभाजित कर नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। नोटिस में झील की जमीन और ग्रीन लैंड पर भवन निर्माण कराने की बात कही गई। इसी तरह मीरगंज, मड़ियाहूं, डोभी, मुंगराबादशाहपुर में सबसे अधिक तालाबों पर अतिक्रमण किया गया। मीरगंज में तालाब पाटकर घर बना लिया गया। आईजीआरएस पर भी बिना स्थलीय निरीक्षण के मनमानी रिपोर्ट लगा दी गई है।
जलालपुर : क्षेत्र के भवनाथपुर ग्राम पंचायत के खालिसपुर कला पुरवां में करीब नौ एकड़ का सरकारी ताल है। इस जमीन पर गांव के लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसकी शिकायत ग्राम पंचायत की ओर से केराकत तहसील में की गई थी। इसे संज्ञान में लेकर एसडीएम केराकत के निर्देश पर तहसीलदार केराकत जयराम मौर्य ने प्रकरण की विधिवत जांच कर रिपोर्ट प्रशासन को दी।
गौराबादशाहपुर : आरा गांव में एक व्यक्ति की शिकायत के बाद तालाब से अतिक्रमण हटाया गया। गांव के ही एक व्यक्ति ने तालाब की जमीन पर कब्जा कर लिया था। गांव के कई तालाबों पर अब भी अवैध रूप से कब्जा किया गया है। वहीं गौराबादशाहपुर कस्बे में भी तालाब की जमीन पर कई दुकान और घरों का निर्माण हो चुका है।
मछलीशहर : तहसील के अधिवक्ताओं ने बीते 19 जून को एसडीएम को प्रार्थना पत्र दिया था। अधिवक्ताओं का आरोप है कि नगर के 30 तालाबों पर भूमाफिया ने फर्जी नाम दर्ज कराकर अतिक्रमण कर लिया है। वाटर रिचार्जिंग के स्रोत तालाब के पटने के बाद नगर में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। अधिवक्ताओं का समूह फर्जी इंद्राज खारिज करने और तालाबों से अतिक्रमण हटवाने की मांग को लेकर एसडीएम राजेश कुमार चौरसिया से वार्ता की और ज्ञापन सौंपा। उपजिलाधिकारी ने अधिवक्ताओं को आश्वस्त किया कि 30 तालाबों से संबंधित मुकदमों की हफ्ते में दो दिन सुनवाई कर फर्जी इंद्राज निरस्त कर तालाबों से कब्जे हटवाए जाएंगे। इसके पूर्व भी मछलीशहर तहसील में अधिवक्ता प्रेमचंद्र विश्वकर्मा, आलोक विश्वकर्मा प्रबंधक सर्व गूंज फाउंडेशन मछलीशहर की तरफ से तालाबों के अतिक्रमण को लेकर 2017 में प्रार्थना पत्र दिया गया था। उन्होंने मछलीशहर के धिसुआ में पैमाइश कराने की मांग की। उनका आरोप है कि 233 हेक्टेयर (करीब 932 बीघा) भूमि पर चिह्नांकन कर अतिक्रमणमुक्त कराएं। इसमें प्रशासन की तरफ से अभियान चलाकर कई हिस्सों को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। दो साल बीतने के बाद पुन: लोगों ने कब्जा कर लिया।