जिले में मानसून ने दस्तक दे दी है। लेकिन बिजली के हाईटेंशन तारों और केबल बक्सों को सुरक्षित रखने की विभाग की तैयारियां अभी अधूरी हैं। तारों के पास से गुजरने वाले पेड़ों की छंटाई न होने से भी बारिश में उपभोक्ताओं कोे ट्रांसफार्मर जलने और तार टूटने की फजीहत झेलनी पड़ सकती है। लेकिन बिजली विभाग की ओर से इनसे निपटने के लिए कोई पहल शुरू नहीं की गई है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि बारिश के दिनों में विद्युत आपूर्ति में किसी भी बाधा से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई है।
हाईटेंशन तार तमाम स्थानों पर बाग बगीचों से होकर गुजरे हैं। बारिश के समय तेज आंधी के चलते पेड़ की डालियों से टकराकर शार्ट सर्किट होने और तार टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मानसून से पहले अगर हाईटेंशन तार के आस पास पेड़ों की डालियों की छंटाई नहीं की गई तो ट्रांसफार्मर जलने और तार टूटने से विद्युत आपूर्ति में संकट उत्पन्न हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक हर माह तकरीबन 400 ट्रांसफार्मर जल रहे हैं। इन्हें रिेपेयर करने में बिजली विभाग को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। बता दें कि जिले के ग्रामीण अंचल में 19500 और शहरी इलाके में 550 ट्रांसफार्मर लगे हैं। इसके अलावा शहर में आठ और ग्रामीण अंचल में 17 मोबाइल ट्रांसफार्मर हैं।