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Jaunpur News: पिछले साल से 5 फीसदी बढ़ी बिजली की खपत, कटौती कर बैलेंस बना रहा निगम

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अहियापुर ​स्थित वर्कशॉप में रखा ट्रांसफार्मर। संवाद
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जौनपुर। भीषण गर्मी के साथ बिजली की खपत तेजी से बढ़कर 350 मेगावाट से 550 मेगावाट पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5 फीसदी अधिक है। बढ़ी हुई मांग को पूरा करने में बिजली विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते कटौती कर आपूर्ति को संतुलित किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि ओवरलोडिंग से ट्रांसफॉर्मर जलने और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं से बचने के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। गर्मी से राहत पाने के लिए लोगों द्वारा एसी, कूलर, फ्रिज और डीप फ्रीजर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पहले जहां एक घर में एक एसी चलता था, वहीं अब दो से चार एसी तक इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन बिजली निगम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वर्ष 2023 में आरडीएसएस योजना के तहत जिले को 248 करोड़ रुपये का बजट मिला था। इस राशि से नए ट्रांसफॉर्मर लगाने, उनकी क्षमता बढ़ाने, एलटी लाइनों की रिकंडक्टिंग और नए तार बिछाने का काम होना था। उम्मीद थी कि इससे जिले को बिजली कटौती से मुक्ति मिलेगी और लो वोल्टेज व ट्रिपिंग जैसी समस्याएं खत्म होंगी। लेकिन, तीन साल बीतने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका है। बिजली निगम के अनुसार, नए विकसित शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति की स्थिति पुराने क्षेत्रों की तुलना में कमजोर है, क्योंकि वहां अभी पूर्ण शहरी बिजली व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। वर्तमान में नए क्षेत्रों में औसतन 18 घंटे और पुराने क्षेत्रों में 20 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति 16 घंटे से अधिक नहीं पहुंच पा रही है। गर्मी बढ़ने के साथ बाजार में एसी, कूलर और फ्रिज की कीमतों में भी उछाल आया है। जो एसी पहले 30-35 हजार रुपये में मिलते थे, अब 40-50 हजार रुपये तक पहुंच गए हैं। कूलर की कीमत 10 हजार से बढ़कर 14-15 हजार रुपये हो गई है, जबकि फ्रिज के दाम में 5-6 हजार रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। क्षमता वृद्धि न होने से ट्रांसफॉर्मर तेजी से फुंक रहे हैं। शहर में इन्हें अधिकतम 5 घंटे में बदल दिया जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें 12 से 24 घंटे तक लग जाते हैं। अप्रैल में प्रतिदिन औसतन 106 ट्रांसफॉर्मर फुंके, जबकि मार्च में यह संख्या 65 थी। जिले में कुल 63,859 ट्रांसफॉर्मर हैं, जिनमें से रोजाना 35-40 की मरम्मत की जाती है।
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