करंजाकला। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में वर्ल्ड एनेस्थीसिया डे के अवसर पर बृहस्पतिवार को एनेस्थीसिया विभाग की ओर से सीपीआर जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस मौके पर चिकित्सा विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को हृदयगति रुकने की स्थिति में जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) की जानकारी दी गई।
प्रधानाचार्य प्रो. आरबी कमल ने कहा कि तेज रफ्तार जिंदगी, मानसिक तनाव और नींद की कमी के कारण हृदय रोग, मधुमेह और अवसाद जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, प्राणायाम और योगाभ्यास से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और हृदय की कार्यक्षमता मजबूत होती है। प्रो. कमल ने बताया कि लंबी और गहरी सांस लेने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है तथा तनाव हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्तर कम होता है। डॉ. अरविन्द पटेल ने कहा कि सीपीआर का पहला प्रयोग 18वीं शताब्दी में यूरोप में हुआ था, जबकि आधुनिक तकनीक 1960 में डॉ. पीटर सफर और डॉ. जेम्स एलाम ने विकसित की। उन्होंने बताया कि सीपीआर का मुख्य उद्देश्य हृदय की धड़कन और सांस रुकने की स्थिति में रक्त संचार व ऑक्सीजन आपूर्ति को बनाए रखना है ताकि मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान न पहुंचे। कहा कि सीपीआर केवल चिकित्सकों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जरूरी है। कार्यक्रम में डीन रिसर्च प्रो. रुचिरा सेठी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. एए जाफरी, प्रो. भारती यादव आदि रहे।