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टूटी सड़कों से उड़ रही धूल, सांस लेना मुश्किल

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जौनपुर। बारिश खत्म होते ही हाईवे समेत जिले की सभी टूटी सड़कों पर धूल उड़ रही है। धूल के चलते लोग सांस और आंख के मरीज हो रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी सड़कों के किनारे रहने वाले लोगों को हो रही है। तमाम लोग रात में भी मास्क लगाकर सोते हैं। सड़कों के किनारे लगी दूकानों पर खाद्य सामग्री भी दूषित हो रही है। कई इलाकों में तो इस कदर समस्या है कि दिन में भी वाहन लाइट जलाकर चलते हैं। लेकिन समस्या का समाधान किसी को सूझ नहीं रहा है। धूल की समस्या से परेशान कई लोगों ने मुख्य मंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत की है।
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वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग, दुद्धी लुंबनी हाईवे पर धूल की समस्या बेहद जटिल हो गई है। वाराणसी सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने का काम चल रही है। जिससे पुरानी सड़क टूटने के अलावा सड़क किनारे कई स्थानों पर मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है। बड़े वाहनो के दबाव के चलते दिन रात यहां धूल उड़ रही होती है। अलीगंज निवासी संजय कुमार कहते हैं कि सड़क किनारे घर है। सुबह बिस्तर पर धूल की मोटी परत जम जाती है। मास्क लगाकर सोते हैं। घरों के अंदर भी धूल की परत जम जाती है।
नेशनल हाईवे समेत शहर के अधिकांश स्टेट हाईवे में धूल के गुबार उड़ रहे हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। इससे लोग एलर्जी समेत श्वास और आंखों की तकलीफ के शिकार हो रहे हैं। धूल से पैदा हो रही समस्या का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन आंख की समस्या लेकर 10 से 15 नए मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर को एलर्जी की समस्या रहती है। इसके अलावा श्वास के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। डॉक्टरों की मानें तो सड़क में उडने वाली धूल की वजह से आंखों की रोशनी तक जा सकती है। दुद्धी लुंबनी मार्ग से ही मिर्जापुर, सोनभद्र आदि जिलों से गिट्टी बालू लदे ट्रक गुजरते हैं दिन रात इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव रहता है। सबसे अधिक समस्या जमालापुर से भदोही जिले की सीमा तक है। सरौना, जमालापुर जोगापुर, रायपुर, रामजीनगर, संजयनगर, यादव नगर, गंधौना, रामपुर, पचवल समेत दर्जनों गांवों प्रभावित हैं। यहां सड़क से उठने वाली धूल के चलते सड़क किनारे के पेड़ों की पत्तियां भी धूल से जमा हो गई है। सड़क पर चलने वाले भारी वाहनों की वजह से दिनरात धूल का गुबार उड़ता है। यदि कोई इनके पीछे आ जाए, तो गुबार की वजह से कुछ देर तक सामने का दृश्य ही नहीं दिखता। इसके अलावा कई स्थानों में सड़क पर छोटे-बड़े गड्ढे भी हो गए हैं, जो मुसीबत बन रहे हैं। सड़क किनारे रहने वाले लोग, दुकानदार और राहगीरों को इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धूल के कारण लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। धूल से बच्चों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
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धूल उडने की शिकायत मिली है। जिन स्थानों पर टूटी सड़कों के चलते धूल उड़ रही है वहां पानी के छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं। टूटी सड़कों की मरम्मत भी कराने का काम शुरू कर दिया गया है।
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एसवी सिंह परियोजना प्रबंधक एनएचएआई
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