जौनपुर। केंद्रीय संगठन के आह्वान पर दवा प्रतिनिधियों ने अगस्त क्रांति दिवस पर तख्तियों लेकर विरोध दर्ज कराया। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दवा प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया।
यूपीएमएसआरए के राज्य सचिव नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज हुआ था, जिससे भारतीयों को गुलामी की जंजीर से मुक्ति मिली थी। आज स्वतंत्र भारत में मौजूदा सरकार तमाम सार्वजनिक क्षेत्रों जैसे रेल, एयरपोर्ट, कोयला, बिजली, एलआईसी आदि कंपनियों को व्यक्तिगत हाथों में दे रही है। इसके विरोध में कामगारों ने भारत बचाओ आंदोलन का बिगुल बजाया है। दवा प्रतिनिधियों ने आठ सूत्री ज्ञापन के जरिए पेट्रोलियम पदार्थों का मूल्य नियंत्रण में लेने, श्रम कानूनों के निलंबन का फैसला वापस लेने, सेल्स प्रमोशन एंप्लायज एक्ट को यथावत रखने, सार्वजनिक क्षेत्र की दवा कंपनियों को पुर्नजीवित करने, दवा प्रतिनिधियों पर मानसिक शोषण व प्रताड़ना बंद करने की मांग की। प्रदर्शन में विजय श्रीवास्तव, मनोज सिंह, अमित रंजन श्रीवास्तव, अजय सिंह, सुनील प्रजापति, अभिषेक विक्रम सिंह आदि शामिल रहे।
रेल बचाओ-देश बचाओ का बुलंद किया नारा
जौनपुर। नार्दन रेलवे मेंस यूनियन शाखा जौनपुर अध्यक्ष आरके श्रीवास्तव के नेतृत्व में सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में सोशल डिस्टेसिंग को ध्यान में रखते हुए भंडारी जंक्शन पर धरना प्रदर्शन किया गया। रेल कर्मचारी सुबह नौ बजे से बारह बजे तक ट्विटर पर रेल बचाओ और देश बचाओ अभियान के तहत ट्वीट करते रहे। कार्यालय पर एकत्रित हुए और भंडारी जंक्शन स्टेशन के मुख्य गेट पर नारेबाजी की। गोष्ठी में शाखा मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि भारत सरकार रेलवे का निजीकरण करने की ओर कदम बढ़ा रही है। वह रेल बेचने पर उतारू है, जिसका एआईआरएफ, एनआरएमयू विरोध करेगा। किसी भी दशा में निजीकरण को रोका जाएगा। विरोध प्रदर्शन में सहायक शाखा मंत्री एमके मीणा, कोषाध्यक्ष एके मिश्रा आदि शामिल रहे।