स्टेशन रोड पर छठ पूजा के लिए दउरी और सूप की खरीददारी करती महिलाएं।
डाला छठ व्रत की तैयारी शुरू हो गई है। गोमती घाट की सफाई के साथ घरों में व्रती महिलाएं खरीदारी में जुटी है। कार्यसिद्धि और उर्जा प्राप्ति की कामना से होने वाले इस व्रत में बड़ी संख्या में लोगों को जमावड़ा गोमती नदी के किनारे होगा।
व्रती महिलाएं छह को पहला अर्घ्य देगी। पूरब से लोकप्रिय हुए डाला षष्ठी व्रत में शामिल होने के लिए बाहर से लोग घर पहुंच गए हैं। सांस्कृति, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक मान्यता वाले इस व्रत को महिलाएं पतियों, संतान की लंबी उम्र और नइहर से ससुराल तक के मंगल की कामना पूर्ति के लिए करती हैं।
नहाय खाय की रस्म चार नवंबर को शुरू होगी। कार्यसिद्धि की कामना से छह नवंबर की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। सात नवंबर की सुबह उगते सूर्य के अर्घ्य के साथ ही इस व्रत की पूर्णाहुति हो जाएगी। गोमती के घाटों पर वेदियां बनाने के लिए अभी से सफ ाई का काम शुरू हो गया है।
ब्रह्म के प्रतीक सूर्य और प्रकृति की प्रतीक षष्ठी माता की आराधना होती है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति की कामना के साथ ही पति, बंधु, बांधवों के दीर्घायु के लिए आराधना की जाती है।
यह पर्व दायित्व निर्वहन का बोध कराने का भी प्रतीक है। षष्ठी माता को आदिशक्ति भी कहा जाता है। इसलिए कर्तिक मास की षष्ठी को लोकहित की कामना से आदिशक्ति की छठी माता के रूप में लोक मंगल के लिए आराधना की जाती है।