मछलीशहर। प्रयागराज में आयोजित कवि सम्मेलन में इबरत मछलीशहरी को बुद्धिसेन शर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इनके सम्मान में रविवार को नगर के खानजादा मोहल्ले में उनके आवास पर शायरों ने कार्यक्रम आयोजित किया। नगर के खानजादा मोहल्ले में इबरत मछलीशहरी के आवास पर पहुंचे नगर के शायरों ने अपनी रचनाएं सुनाई। कितना खुश रंग मौसम वसूलों का था, लोग कांटों के थे, शहर फूलों का था, सज गया हूं जो कांटों से तो, हैरत न कर, मेरी राहों में जंगल बबूलों का था...। सभी ने रचना को खूब सराहा। कविता की लोगो ने मुक्त कंठ से इबरत साहब की सराहना की। अखिलेश मौर्य ने कहा कि मछलीशहर नगर की शेरो शायरी भरी उपजाऊ भूमि पर कितने अज़ीम शायर गुजर गए, जिनका नाम उनकी फनकारी आज भी मुकम्मल कायम है। इबरत मछलीशहरी अभी हमारे बीच मौजूद है। जिनकी शायरी में दर्द की चाशनी, मुहब्बत का सुकून और भाईचारे की खूशबू है। इबरत साहब के खानजादा मोहल्ले में स्थित आवास पर नगर के शायरों ने रविवार को बैठक कर उन्हें मुबारकवाद दी है। प्रयागराज में शुक्रवार को बुद्धिसेन शर्मा की याद में आयोजित कवि सम्मेलन में इस का़बिल शायर को उनकी बेजोड़ शेर-ओ-शायरी के लिए बुद्धिसेन शर्मा अवार्ड से सम्मानित किया गया। जो पूरे जिले के लिए फख्र की बात है। नगर के एक युवा कवि प्राणेन प्रताप श्रीमाली, जो इबरत मछलीशहरी के शिष्य हैं, उन्हें कलम का उस्ताद बताया। श्रीमाली इबरत के होनहार शिष्यों में अव्वल दर्जे पर गिने जाते हैं। बधाई देने वालों में हनीफ मछलीशहरी, प्रेमा कुमारी, इम्तियाज गांवी शामिल रहे।