पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने रविवार को यहां छात्र-छात्राओं को चहुंमुखी तरक्की करने की सीख दी। टीडी कालेज के स्थापना शताब्दी और तिलक जयंती समारोह में उन्होंने कहा कि पतंग की तरह असीम ऊंचाइयां हासिल करो,
लेकिन कभी अपनी संस्कृति और तहजीब से जुड़ी डोर को टूटने मत देना। कटी पतंग का कोई निश्चित ठिकाना नहीं होता। वह कभी गटर में गिर जाती है तो कभी बिजली के पोल या फिर झाड़-झंखाड़ में अपना अस्तित्व खो देती है।
उन्होंने शिक्षण संस्थानों को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें देश को अच्छे नागरिक देने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।
समारोह की मुख्य अतिथि प्रतिभा देवी पाटिल ने कहा कि एक बार अंबेडकर जी ने कहा था कि शिक्षा से जनसाधारण
ताकतवर बनता है। यह तीसरी आंख है। प्रथम विश्वयुद्ध के समय तिलकधारी सिंह ने शिक्षा की ज्योति जलाने के लिए इस संस्थान की स्थापना की थी। कर्तव्य निष्ठा, नीति शास्त्र, आध्यात्मिक सोच और सभ्य नागरिक बनाने की जो प्रेरणा
लेकर ये कालेज संचालित हो रहा है, देश में अच्छे नागरिक तैयार करने के लिए ऐसे ही कालेजों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे सद्गुणों की गुणात्मक बढ़ोतरी हो और दुर्गुणों दूर हों। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ
डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और देश को संभालने के लायक बनाना होना चाहिए। छात्राआें में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि कल तक जिन महिलाओं को पुरुषों के संरक्षण की जरूरत पड़ती थी, वही महिलाएं आज पुरुषों का
संरक्षण कर रही हैं। अध्यक्षीय संबोधन में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मनुष्य की पहचान पद से नहीं, उसके कार्यों से होती है। तिलकधारी सिंह के कृत्यों को देखने-समझने के बाद पता चलता है कि जो त्याग करता है, उसी को
सम्मान मिलता है। संचित करने वाले को सम्मान नहीं मिलता। मर्यादा की रक्षा के लिए ही भगवान श्रीराम के लिए मां सीता को अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृतियों के कारण ही आज भारत विश्व में सम्मान की
दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने छात्रों से सवाल किया कि गणित के द्विघातीय समीकरण का जनक कौन है। इस पर कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि द्विघातीय समीकरण देने का श्रेय भी एक भारतीय को है,
जिनका नाम है श्रीधराचार्य। उन्होंने कहा कि किसी भाषा का ज्ञान रखना गलत नहीं, परंतु मातृभाषा को भूल जाना गलत है।
इससे पूर्व प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि टीडी कालेज की स्थापना से लेकर आज तक का इतिहास-भूगोल अद्वितीय है। इतिहास उन्हीं को याद करता है जो दूसरों के लिए कुछ कर जाते हैं।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने टीडी कालेज को शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा कालेज बताया तो बीएचयू के पूर्व कुलपति पद्मश्री डा. लालजी सिंह ने गांव में भी शहर की तरह विज्ञान की शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।