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Jaunpur News: डीएनए वैज्ञानिक डॉ. लालजी माटी से रखते थे गहरा लगाव

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सिकरारा। कलवारी गांव में डीएनए फिंगर प्रिंटिंग के भारत में पहले शोधकर्ता व काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह की 78वीं जयंती शनिवार को कलवारी स्थित डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर पर श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। मुख्य आयोजक डॉ. आशीष सिंह ने कहा कि डॉ. लालजी सिंह न केवल एक महान वैज्ञानिक थे, बल्कि वे अपनी माटी के प्रति गहरी निष्ठा रखने वाले देश के सच्चे सपूत थे। उनके डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के कार्य ने भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया। उन्होंने बताया कि डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. आशीष ने युवाओं से उनके पदचिह्नों पर चलकर विज्ञान और समाजसेवा को जोड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि 25 वर्ष पहले उनके द्वारा प्रतिपादित पर्सनलाइज्ड मेडिसिन का सिद्धांत आज विश्व स्तर पर मान्य है। डॉ.सिंह ने 1995 में हैदराबाद में सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स (सीडीएफडी) की स्थापना की, जिसने कई हाई प्रोफाइल मामलों जैसे राजीव गांधी हत्याकांड और नैन साहनी हत्याकांड को सुलझाने में मदद की।डॉ.आशीष सिंह ने बताया कि रिसर्च सेंटर ग्रामीण भारत में जेनेटिक डायग्नोस्टिक्स को सुलभ बनाने के लिए कार्यरत है। डॉ.आशीष सिंह ने घोषणा किया कि डॉ.लालजी सिंह रिसर्च सेंटर में जल्द ही एक नया जेनेटिक्स प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जो स्थानीय युवाओं को जैव प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित करेगा।
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इस मौके पर प्राचार्य डाॅ.एके श्रीवास्तव, डॉ.धर्मेंद्र यादव, डॉ.राजेश यादव, अरूण कुमार, प्रकाश सिंह, रमेश सिंह, जय देवी, अभिषेक यादव, पवन आदि रहे।
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