जलालपुर। तालामझवारा पड़ान गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को काशी से आए कथावाचक पं. निलेश महाराज वेंकटेश ने कहा कि परमात्मा का जन्म तब होता है, जब मनुष्य की इंद्रियां संयमित होती हैं। कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही कथाव्यास ने प्रभु के प्राकट्य का प्रसंग सुनाया, पूरा पडाल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नृत्य और पुष्पवर्षा कर कान्हा के आगमन का स्वागत किया। कथा मर्मज्ञ ने कहा कि जब जीव संसार के मोह-माया के जाल में फंस जाता है और चारों ओर से संकट उसे घेर लेते हैं, तब केवल परमात्मा की शरणागति ही उसे मुक्ति दिलाती है। उन्होंने बताया कि भगवान को पाने के लिए धन या शक्ति की नहीं, बल्कि शुद्ध भाव और अहंकाररहित व्यक्तित्व की आवश्यकता होती है। इस मौके पर जगदीश त्रिपाठी, ब्लाॅक प्रमुख बंसराज सिंह, लालसाहब सिंह, डॉ. अखिलेश सिंह, शीतलाप्रसाद पांडेय, शिव शिवांक मिश्रा आदि उपस्थित रहे।