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ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों के बाद भी पर्यटन के नक्शे पर नहीं आया शहर

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जौनपुर। उत्तर भारत के शक्तिशाली शर्की वंश का केंद्र होने के कारण जौनपुर में ऐतिहासिक धरोहरों की कमी नहीं है। शाही किला, अटाला मस्जिद, शाह फिरोज का मकबरा समेत ऐतिहासिक महत्व के तमाम स्थल हैं। इसके बावजूद शहर पर्यटन के नक्शे में नहीं आ सका है। सैलानियों को इसकी जानकारी ही नहीं है लिहाजा वे यहां आते ही नहीं।
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शाही पुल, झझरी मस्जिद, दो अंगुल की मस्जिद, हमाम दरवाजा, लाल दरवाजा, कुलीच खां का मकबरा, बड़ी मस्जिद, शीतला चौकिया धाम, बारह दुअरिया जैसी कई अन्य ऐतिहासिक महत्व की इमारतें जिले में मौजूद हैं। पर्यटन के नक्शे पर न होने के बाद भी इस शहर में मौजूद ऐतिहासिक महत्व की इमारतों का दीदार करने के लिए हर साल सैलानी आते हैं। हालांकि कोविड 19 के चलते मार्च के बाद इस शहर में विदेशी नहीं आए हैं। पुरातत्व विभाग के कनिष्ठ संरक्षण सहायक जे राजू के मुताबिक वर्ष में करीब सौ के आस पास विदेशी यहां आते है। अगर इसे पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए तो सैलानियों के लिए यह शहर आकर्षन का केंद्र हो सकता है। तमाम लोगों को रोजी रोटी के अवसर भी मिल जाएंगे।
शहर के मध्य में स्थित अटाला मस्जिद को वर्ष 1408 में इब्राहिम शाह शर्की ने बनवाया था। इसकी उचाई 100 फीट से अधिक है। इसका र्निमाण सन् 1393 ई में फिरोज शाह ने शुरू कराया था। जबकि शहर में गोमती नदी के किनारे स्थित शाही किले का निर्माण फिरोज शाह ने 1362 में कराया था। इस दुर्ग के भीतरी फाटक 26.5 फीट उंचा और 16 फीट चौड़ा है। इसके सामने के शानदार फाटक को मुनीम खां ने सुरक्षा की दृष्टि से बनवाया था। अंदर तुर्की शैली का हमाम एवं एक मस्जिद भी है। शहर के करीब में स्थित शीतला चौकियां देवी का मंदिर बहुत पुराना है। जो लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है।
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