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शहर के बीच खड़े सैकड़ों जर्जर भवनों पर बारिश का खतरा

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रूहट्टा में सालों से जर्जर बिल्डिंग हादसे को दे रही दावत। संवाद - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। बारिश में जर्जर भवनों के ढहने का खतरा बढ़ गया है। लेकिन जिम्मेदार ऐसे भवनों को लेकर बेपरवाह बने हुए हैं। बात अगर जर्जर भवनों की करें तो अकेले केवल शहर में 175 से अधिक पुराने और जर्जर मकान हैं। इसके अलावा, कई विभागों के भी भवन जर्जर हालत में हैं। हालांकि हादसे के बाद अपने को बचाने के लिए कागजी कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, मगर इन भवनों में कई तो ऐसे हैं, जिन्हें देखकर बाहर से ही डर लगता है, मगर मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। ऐसे भवनों में कई सरकारी कार्यालय भी शामिल हैं।
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शहर क्षेत्र में ओलंदगंज, रूहट्टा, बांसफोड़ वाली गली, अहमद खां मंडी, बजरंग घाट आदि स्थानों पर जर्जर मकान हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। उनके गिरने से बड़ा हादसा होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। कई मकान तो प्रमुख बाजारों के बीच सड़कों पर मौजूद हैं, जिनके गिरने से कई लोगों की जाने जा सकती हैं। लगभग ऐसे ही हालत ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। मकान जर्जर हो गया है, लेकिन उसमें लोग रहने को विवश हैं। इसी तरह, सदर पशु अस्पताल, रोडवेज वर्कशाप, जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम और जिला कृषि रक्षा कार्यालय, राजकीय इंटर कालेज का भवन सहित कई अन्य विभागों के भी भवन जर्जर हो गए हैं। इन कार्यालयों में लगभग 200 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन भवन जर्जर होने से हर समय उनकी जान को खतरा बना रहता है। हालत यह है कि भवन जर्जर होने के कारण बारिश का पानी छत से बाहर जाने के बजाय अंदर कमरों में गिरता है। हल्की बारिश होने पर झरने की तरह छत से पानी टपकता है। इससे काम करने में कर्मचारियों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वहीं, कार्यालय के अभिलेख भी भींगते रहते हैं। अभिलेखों को सुरक्षित रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
भवन देखकर लगता है डर
जौनपुर। सदर तहसील का नजारत कक्ष व लेखपाल कक्ष जर्जर हो गया है। उसकी मरम्मत भी नहीं कराई जा रही है। जबकि हर साल डेढ़ लाख रुपये आता है। मगर, इस समय बरामदा टूटा हुआ है। छत भी जगह-जगह चिटक गई है। बारिश में झरने की तरह पानी कमरों में गिरता है। अभिलेखों को भी रखने में परेशानी का सामाना करना पड़ रहा है। अभिलेखों को या तो कर्मचारी अपने साथ ले जाते हैं या फिर दूसरे कार्यालयों में रखते हैं। हालांकि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल का कहना है कि निष्प्रयोज्य घोषित करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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बारिश होने पर टपकता है पानी
जौनपुर। लोहिया पार्क स्थित कृषि भवन में बने जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम और जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय जर्जर हो गया है। एक कमरे का छत टूट कर गिर चुकी है। अन्य कमरों की छत भी जर्जर है, जिसके गिरने का खतरा बना हुआ है। यही हालत भूमि संरक्षण प्रथम और जिला कृषि रक्षा अधिकारी के कार्यालय का भी हाल है। इन कार्यालयों की छतें और दीवारें जर्जर हो गए हैं। बारिश में तो पानी टपता है और कंप्यूटर तक को हटाना पड़ता है। जिला कृषि अधिकारी केके सिंह कहते हैं कि हमेशा डर लगा रहता है। इस समय तो किसान भी आते हैं, जिससे और डर लग रहा है। हालांकि कई बार पत्राचार किया जा चुका है।
हर दिन मंडराता रहता है मौत का साया
जौनपुर। जिला कारागार परिसर में बंदी रक्षकों के मकान की दशा देखकर सोचने को मजबूर होना पड़ता है। क्योंकि यहां आप एक दिन भी उसमें रात गुजारने की हिम्मत नहीं जुटा सकते हैं। यहां तक साफ तौर पर कहा जा सकता है कि हर रोज इस परिवार पर मौत का साया मंडराता रहता है। बार-बार शिकायत के बाद भी जेल प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि इस संबंध में जेल अधीक्षक एसके पांडेय का कहना है कि मैंने सभी जर्जर आवासों की मरम्मत के लिए अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग से आगणन तैयार कराके स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा है। हालांकि बंदी रक्षकों के आवास के लिए 16-16 क्षमता के तीन बैरकों (डारमेट्री) का भी प्रस्ताव भेजा गया है, जिसके स्वीकृति मिलते ही यहां तत्काल काम शुरू करा दिया जाएगा।
जर्जर भवनों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद संबंधित को नोटिस दिया जाएगा। साथ ही आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। - रजनीश राय, अपर जिलाधिकारी भू-एवं राजस्व (नोडल अधिकारी शहर)

जिला कारागार के सिपाहियों के रहने का आवास जर्जर अवस्था में दुर्घटना को दे रहा दावत। संवाद- फोटो : JAUNPUR

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